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कौन थे जगुआर फाइटर जेट हादसे में शहीद हुए पायलट लोकेंद्र सिंह? एक महीने पहले ही बने थे पिता

IAF Pilot Lokendra Singh: जगुआर विमान हादसे में बुधवार को दो पायलट शहीद हो गए। इसमें हरियाणा के रहने वाले लोकेंद्र सिंह 10 जून को एक बेटे को जन्म दिया था। जानिए कौन थे स्क्वाड्रन लीडर लोकेंद्र सिंह सिंधु।

IAF Pilot Lokendra Singh: राजस्थान के चूरू में बुधवार को भारतीय वायुसेना का एक ट्रेनर जगुआर लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में स्क्वाड्रन लीडर लोकेंद्र सिंह सिंधु और फ्लाइट लेफ्टिनेंट ऋषि राज सिंह दो पायलट शहीद हो गए। इस साल में जगुआर विमान तीसरी बार हादसे का शिकार हुआ है। इससे यह जेट सवालों के घेरे में आ गया है। हादसे में शहीद पायलट लोकेंद्र सिंह मूल रुप से हरियाणा के रोहतक के खेड़ी साध गांव रहने वाले थे। वह 10 जून को ही पिता बने थे। लोकेंद्र ने छु्ट्टी से वापस आकर 30 जून को ही ड्यूटी ज्वाइन की थी।

अंतिम राइड से शेयर कीं थी बेटे की फोटो

बुधवार को जगुआर से उड़ान भरने से पहले लोकेंद्र ने अपने पिता जोगिंदर को कॉल किया था। लोकेंद्र ने अपने 1 माह के बेटे की कुछ फोटो फैमिली ग्रुप पर शेयर की थीं। लेकिन किसे पता था कि लोकेंद्र अंतिम बार पिता से बात कर रहे हैं और अंतिम बार बेटे की फोटो देख रहे हैं।

वायुसेना से है पुराना नाता

लोकेंद्र सिंह का परिवार हरियाणा के रोहतक में रहता है। लेकिन मूल रुप से वह खेड़ी साध गांव के रहने वाले हैं। लोकेंद्र की पत्नी सुरभि सिंधु पेशे से डॉक्टर हैं। सुरभि ने अपने मायके हिसार में बेटे को जन्म दिया। लोकेंद्र की शहादत के समय भी सुरभि अपने मायके में ही थीं। लोकेंद्र अपने परिवार में पहले भारतीय वायुसेना से जुड़ने वाले व्यक्ति नहीं हैं। उनसे पहले उनकी बहन अंशी भारतीय वायुसेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन ऑफिसर से रिटायर हुईं हैं। साथ ही लोकेंद्र के जीजा भी सेना में विंग कमांडर पद पर हैं।

2011 में ज्वाइन किया थी एयरफोर्स

32 साल के लोकेंद्र सिंह ने साल 2011 में इंडियन एयरफोर्स ज्वाइन की थी। लोकेंद्र के पिता जोगिंदर सिंह महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से 2023 में अधीक्षक के पद से रिटायर हुए हैं। वहीं मां टीचर हैं। लोकेंद्र के बड़े भाई एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं। लोकेंद्र ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के कैंपस स्कूल से अपनी स्कूलिंग पूरी की थी। वर्तमान में लोकेंद्र की तैनाती राजस्थान के सूरतगढ़ में थी। 12वीं पास करने के बाद ही लोकेंद्र ने पहले प्रयास में ही NDA की परीक्षा पास कर ली थी। इसके बाद साल 2015 में उसे कमीशन मिल गया था।


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