Iqra Hassan Responds ECI: समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सवाल उठाए हैं। इकरा हसन ने News24 को दिए 5 मिनट के वीडियो में कहा कि बुर्के वालियों का चेहरा बुर्के हटाकर देखते हैं और वोटर्स के वीडियो मांगे तो कहते हैं कि मां-बहन के वीडियो हैं। चुनाव आयोग ने बिहार SIR और ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पूरी दुनिया में भारतीय लोकतंत्र का मजाक उड़ाया है।
आपत्तियां देने की अवधि पर सवाल उठाए
इकरा हसन ने कहा कि चुनावी गड़बड़ियों पर हमारी शिकायतें उनके पास कैसे पहुंचेंगी? जब शिकायत की अवधि इतनी कम दी जाएगी और सब कुछ लिखित में जाना है। जितना टाइम मिला है, वह पर्याप्त नहीं है। पत्रकार वार्ता में गोल-मोल करके बस एक स्क्रिप्ट पढ़ी गई। चुनाव आयोग की लिस्ट और वीडियो सार्वजनिक करने की नियत नहीं है, क्योंकि धांधली कैसे होगी? देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों पर अंकुश लगे, इसके लिए उन्होंने कुछ भी नहीं कहा।
इकरा हसन ने कहा कि 65 लाख हटाए गए वोटर्स के नाम तो पब्लिश किए, लेकिन करेक्शन का समय बस एक तारीख तक का दिया है। इतनी जल्दी लोग लिस्ट में अपने नाम चेक करके शिकायत कैसे दर्ज कराएंगे? वीडियो को गलत एडिट करने वाली घटना हमारे साथ घटना घटी, तब तो कानून ने कुछ नहीं कहा। कई महिलाओं के साथ गलत वीडियो की घटनाएं घटीं, तब तो कुछ नहीं कहा गया, लेकिन अब खुद को बचाना है तो दलील दे रहे हैं कि मां-बहनों का वीडियो कैसे दें?
यह भी पढ़ें: वोट चोरी विवाद के बीच बिहार के 65 लाख बहिष्कृत वोटर्स की लिस्ट हुई जारी, ऑनलाइन कहां-कैसे करें चेक?
मतदान केंद्रों के CCTV वीडियो पर छिड़ा विवाद
बता दें कि भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और विपक्षी दलों कांग्रेस और राहुल गांधी के बीच बिहार की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट और मतदान केंद्रों के CCTV फुटेज को लेकर विवाद जारी है। विवाद बिहार, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में मतदाता सूची में हेरफेर और वोट चोरी के आरोपों से जुड़ा है। राहुल गांधी ने ECI पर वोट चोरी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट और मतदान केंद्रों की CCTV फुटेज चुनाव आयोग से मांगी है, लेकिन चुना आयोग ने इनकार कर दिया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी के आरोपों को संविधान का अपमान कहा और राहुल गांधी समेत कांग्रेस को जवाब दिया कि चुनाव आयोग वोटर्स की गोपनीयता से खिलवाड़ नहीं करेगा। मतदान केंद्रों की CCTV फुटेज नहीं देगा। चुनाव आयोग ने साल 2019 में दिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट वोटर्स की प्राइवेसी का उल्लंघन कर सकती है। CCTV फुटेज चुनाव परिणाम के बाद केवल 45 दिन तक रखी जाती है, जब तक चुनाव याचिका दायर न हो। फिर इसे नष्ट कर दिया जाता है, ताकि दुरुपयोग न हो।
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