उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इस्तीफे की वजह अपने खराब स्वास्थ्य को बताया है। उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा है कि वह तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। इस्तीफा देने से कुछ घंटे पहले ही वह संसद भवन में मौजूद थे और राज्यसभा का संचालन किया था। इसके एक दिन पहले ही वह एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे और नेताओं से एक भावुक अपील की थी।
उन्होंने देश के नेताओं से अपील की थी कि व्यक्तिगत हमलों से बचना चाहिए। उन्होंने कहा था कि अब समय आ गया है कि हम नेताओं को गालियाँ देना बंद करें। जब विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग दूसरे राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं को गालियाँ देते हैं, तो इससे हमारी संस्कृति को कोई लाभ नहीं होता। हममें मर्यादा और सम्मान का भाव होना चाहिए और यही हमारी संस्कृति है।
और क्या बोले थे उपराष्ट्रपति?
उपराष्ट्रपति ने कहा कि हर राजनीतिक दल का नेतृत्व परिपक्व होता है। हर राजनीतिक दल, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, राष्ट्रीय विकास के प्रति प्रतिबद्ध होता है और इसलिए युवाओं का यह कर्तव्य है कि वे इस मानसिकता से जुड़ें। जब आप पाएंगे कि हमारे टेलीविजन पर होने वाली बहसें सुखदायक, सकारात्मक और आकर्षक होती हैं, तो जरा सोचिए कि कितना बदलाव आ जाएगा।
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उन्होंने यह भी कहा था कि लोकतंत्र कभी भी ऐसा नहीं होता जहां एक ही पार्टी सत्ता में आए। हमने अपने जीवनकाल में देखा है कि परिवर्तन राज्य स्तर पर, पंचायत स्तर पर, नगरपालिका स्तर पर होता है, यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा था कि भारत शायद दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहां सभी स्तरों पर संवैधानिक रूप से संरचित लोकतंत्र है। 30 साल पहले हमारे यहां केवल राज्य विधानमंडल और संसद में ही संवैधानिक लोकतंत्र था, लेकिन अब हमारे यहां ग्राम स्तर पर, पंचायत स्तर पर और जिला स्तर पर भी संवैधानिक लोकतंत्र है।
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जगदीप धनखड़ ने यह बयान उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में राज्यसभा इंटर्नशिप कार्यक्रम (RSIP) के प्रतिभागियों के आठवें बैच के उद्घाटन कार्यक्रम में दिया था। यह कार्यक्रम 20 जुलाई को आयोजित किया गया था और 21 जुलाई को उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।