संसद के बीते शीतकालीन सत्र में VB-G RAM G पर भारी हंगामा हुआ। विपक्ष ने संसद से वॉकआउट तक कर दिया। उस समय इस बिल पर काफी राजनीति हुई। हालांकि भारी हंगामे के बीच ही सही लेकिन बिल संसद में पास हो गया हो। अब इस कानून पर नई राजनीति शुरू हो गई है। कांग्रेस ने इसमें मौका तलाशने के लिए आंदोलन का ऐलान कर दिया है। वहीं अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सड़क पर राजनीति शुरू होने से पहले ही अपनी रणनीति जमीन पर उतार दी है।
पार्टी का साफ आकलन है कि कांग्रेस और विपक्ष इस कानून को “मनरेगा खत्म करने” और “गरीब-किसान विरोधी” करार देकर बड़ा जनांदोलन खड़ा करने की कोशिश करेंगे। इसी आशंका के चलते BJP ने प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक के तौर पर पूरे देश में संगठित आउटरीच और जनजागरण अभियान शुरू करने का फैसला किया है।
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ग्रामीण भारत में फैक्ट बेस्ड जन जागरण कार्यक्रम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संसद से पारित VB-G RAM G विधेयक 2025 को BJP ग्रामीण भारत में एक बड़े संरचनात्मक सुधार के तौर पर पेश कर रही है। पार्टी का दावा है कि यह कानून मनरेगा की जगह लेकर ग्रामीण रोजगार मॉडल को नया आकार देगा, जिसमें रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करने, आजीविका सृजन और टिकाऊ परिसंपत्ति निर्माण पर विशेष जोर होगा। BJP की रणनीति इस कानून को विकसित भारत 2047 के विजन से जोड़कर पेश करने की है।
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पार्टी नेतृत्व का मानना है कि विपक्ष का आंदोलन शुरू होने से पहले ही उसके नैरेटिव को जमीनी स्तर पर खत्म करना जरूरी है। इसी सोच के तहत VB-G RAM G कानून को लेकर राष्ट्रीय जनजागरण अभियान की पूरी रूपरेखा तैयार की गई है। यह अभियान केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि फैक्ट-बेस्ड संवाद के जरिए किसानों और श्रमिकों तक सीधे पहुंच बनाने पर केंद्रित होगा।
इसी रणनीति के तहत BJP ने स्पष्ट रोडमैप तय किया है-
- प्रदेश और जिला स्तर पर विशेष कमेटियों का गठन
- 5–6 जनवरी को सभी प्रदेश BJP मुख्यालयों में प्रेस वार्ता
- 7–9 जनवरी के बीच जिला मुख्यालयों पर प्रेजेंटेशन के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस
- जिला पंचायत, ब्लॉक पंचायत और सरपंच सम्मेलनों के जरिए सियासी एक्टिवेशन
इसके साथ ही सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों और सहकारी संस्थाओं को भी सीधे मैदान में उतारा जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर किसान-श्रमिक चौपालों के जरिए कानून की जानकारी दी जाएगी।
ग्रासरूट्स से डिजिटल तक आक्रामक पहुंच
BJP का फोकस साफ तौर पर ग्रासरूट्स मोबिलाइजेशन पर है। पार्टी घर-घर संपर्क अभियान चलाएगी और गांव-गांव फैक्ट आधारित प्रचार किया जाएगा। किसान पदयात्रा, ट्रैक्टर रैली और बैलगाड़ी रैली जैसे पारंपरिक और प्रतीकात्मक माध्यमों के जरिए संदेश को खेतों तक पहुंचाने की तैयारी है। इसके समानांतर डिजिटल और मीडिया मोर्चे पर भी आक्रामक रणनीति अपनाई जा रही है। Op-Eds, लेख, ब्लॉग, दीवार लेखन और होर्डिंग्स के साथ अखबारों में विज्ञापन और सोशल मीडिया कैंपेन चलाए जाएंगे। Influencers और किसान संगठनों को भी सक्रिय किया जाएगा ताकि विपक्ष के आरोपों का तुरंत जवाब दिया जा सके।
एनडीए सरकारों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
इस पूरे अभियान में NDA शासित राज्यों की सरकारों को भी अहम भूमिका दी गई है। कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रियों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं और संसद से लेकर पंचायत स्तर तक सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को अभियान में शामिल किया जा रहा है।
राष्ट्रीय टीम का गठन
संगठनात्मक स्तर पर इस पूरी कवायद की कमान राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह के हाथ में है, जिन्हें सभी कार्यक्रमों का संयोजक बनाया गया है। उनके साथ किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चाहर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा, राष्ट्रीय मंत्री ओपी धनखड़ और किसान मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. शंभू कुमार को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी गतिविधियों की निगरानी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अलग से मॉनिटरिंग टीम भी गठित की गई है।
कुल मिलाकर, BJP विपक्ष के सड़क पर उतरने से पहले ही जमीन और डिजिटल दोनों मोर्चों पर मजबूत किलेबंदी कर चुकी है। पार्टी का लक्ष्य साफ है कि VB-G RAM G कानून को लेकर “मनरेगा बचाओ” के विपक्षी नैरेटिव को शुरुआती चरण में ही निष्प्रभावी करना और खेत-खलिहान से लेकर सोशल मीडिया तक सियासी बढ़त कायम करना।
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