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‘वंदे मातरम-जय हिंद’ संसद में बोलने की मनाही! संसद में क्या बोलना और क्या करना बैन? सजा का भी है प्रावधान

Prohibited Words in Parliament: संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में कुछ शब्दों को बोलने की मनाही होती है. अगर गलती से भी वे शब्द बोल दिए जाते हैं तो सजा भी मिलती है. हर साल की तरह इस साल भी असंसदीय शब्दों की बुकलेट जारी हुई है, जिसमें वंदे मातरम् और जय हिंद शब्द भी हैं.

Which Words Are Banned in Parliament: राज्यसभा सचिवालय ने असंसदीय शब्दों की बुकलेट जारी करते हुए संसद में वंदे मातरम और जय हिंद शब्दों के प्रयोग न करने की सलाह दी है. अब शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम् और जय हिंद’ शब्दों के इस्तेमाल की मनाही पर एक दिवसीय विशेष चर्चा कराने पर गंभीरता से विचार कर रही है. संसदीय कार्य मंत्रालय रविवार की सर्वदलीय बैठक में इस विषय पर विपक्ष से समर्थन मांगने की तैयारी में है.

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क्या है केंद्र सरकार का मकसद?

राज्यसभा सचिवालय का यह कदम नया नहीं है, क्योंकि UPA सरकार के कार्यकाल के दौरान भी ऐसी ही एक बुकलेट जारी की गई थी, जिसमें इन नारों को संसदीय शिष्टाचार के खिलाफ माना गया था. वहीं NDA सरकार का उद्देश्य ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने को संसद में औपचारिक रूप से चिह्नित करना है. प्रस्तावित बहस में इस गीत के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राष्ट्रवादी महत्व पर प्रकाश डालने की योजना है. खासकर केंद्र सरकार की कोशिश संसद के हर सत्र के अंत में ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रगीत का सामूहिक उच्चारण करके इसकी प्रतीकात्मक अहमियत को और मजबूत करना है.

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बैन शब्द बोलने पर मिलती है सजा

बता दें कि संसद में लोकसभा और राज्यसभा सदन में कोई सांसद असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल करता है तो स्पीकर सजा दे सकते हैं. शब्दों को रिकॉर्ड से हटवा सकते हैं. मामला गंभीर हो तो सांसद को बोलने से रोक सकते हैं या सांसद को निलंबित किया जा सकता है. मामला ज्यादा ही गंभीर हो जाए तो सांसद को सदन से चले जाने के लिए कह सकते हैं. वहीं अगर स्पीकर किसी सदस्य को यह कह दें कि आपको नामित किया जाता है तो मार्शल आकर उस सांसद को बाहर ले जाते हैं.

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बैन है संसद में ये सभी शब्द बोलना

नियमों के अनुसार, संसद में कोर्ट में विचाराधीन किसी मुद्दे पर टिप्पणी करने की मनाही है. राष्ट्रपति के अभिभाषण की आलोचना भी एक हद में रहकर ही की जा सकती है. गाली-गलौज करना मना है, हरामी, कुत्ता, गधा, चोर, डाकू, लुटेरा, भ्रष्टाचारी, देशद्रोही, हत्यारा, झूठा, बेईमान, पाखंडी जैसे अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करना प्रतिबंधित है. सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जजों, देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, संसद, न्यायपालिका, संविधान, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान का अपमान करना प्रतिबंधित है.

संसद के दोनों सदनों में किसी मित्र देश के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करना, किसी राज्य सरकार को नीचा दिखाने वाले शब्द बोलना, दूसरे देशों के खिलाफ बातें करना प्रतिबंधित है. किसी जाति, धर्म, समुदाय को अपमानित करने या हिंसा भड़काने वाले शब्द बोलने पर भी बैन है. लोकसभा स्पीकर या राज्यसभा चेयरमैन को अनुचित शब्द बोलना या पक्षपाती कहना भी मना है. सदन में तथ्यों को छिपाते हुए झूठ बोलना मना है. शेम, शेम, चोर-चोर, हाय-हाय जैसे नारे लगाना भी प्रतिबंधित किया गया है.

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सदन में यह काम करना भी प्रतिबंधित

बता दें कि संसद के दोनों सदनों में कुछ काम करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है, जैसे सदन में नारे लगाना, वेल में आना, पोस्टर, बैनर, तख्ती, झंडा लेकर आना या लहराना, कुछ फेंकना, स्पीकर या चेयरमैन की कुर्सी पर चढ़ना या उनकी ओर बढ़ना, मोबाइल फोन इस्तेमाल करना, फोटो या वीडियो लेना, कार्यवाही को लाइव स्ट्रीम करना, खाना-पीना, धूम्रपान करना या तंबाकू चबाना, सोना, ताली बजाना या सीटी मारना, दूसरे सांसद के बोलते समय बीच में टोकना, जानबूझकर हंगामा करना, गैलरी में आकर नारे लगाना, हथियार या खतरनाक चीज लेकर आना पूरी तरह प्रतिबंधित है.


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