New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दो बड़े फैसले सुनाए। कोर्ट ने चुनाव आयोग में आयुक्तों के चयन के लिए प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश के पैनल बनाने का आदेश दिया। वहीं दूसरा आदेश चुनाव आयुक्तों को हटाने की प्रक्रिया से संबंधित है। कोर्ट ने कहा कि अब चुनाव आयुक्तों को भी महाभियोग प्रक्रिया द्वारा ही हटाया जा सकेगा। जस्टिस केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने आदेश में कहा कि चुनाव आयोग को स्वतंत्र होना चाहिए और यह निष्पक्ष और कानूनी तरीके से कार्य करने और संविधान के प्रावधानों और निर्देशों के मुताबिक पालन करने के लिए बाध्य है।

मतपत्र की शक्ति सर्वोच्च

न्यायमूर्ति जोसेफ ने यह भी कहा कि एक पर्याप्त और उदार लोकतंत्र की पहचान को ध्यान में रखना चाहिए, लोकतंत्र लोगों की शक्ति से जुड़ा हुआ है। मतपत्र की शक्ति सर्वोच्च है, जो सबसे शक्तिशाली दलों को अपदस्थ करने में सक्षम है। बता दें कि इससे पहले 24 नवंबर 2022 को शीर्ष अदालत ने चुनाव आयुक्तों, ईसी और मुख्य चुनाव आयुक्त, सीईसी, की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम जैसी प्रणाली की मांग करने वाली दलीलों के एक बैच पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

याचिका में की गई थी यह मांग

शीर्ष अदालत सीईसी और ईसी की वर्तमान नियुक्ति प्रक्रिया की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी और तर्क दिया कि नियुक्तियां कार्यपालिका की सनक और कल्पना के अनुसार की जा रही हैं। याचिकाओं में सीईसी और दो अन्य ईसी की भविष्य की नियुक्तियों के लिए एक स्वतंत्र कॉलेजियम या चयन समिति के गठन की मांग की गई थी। याचिकाओं में कहा गया है कि सीबीआई निदेशक या लोकपाल की नियुक्तियों के विपरीतए जहां विपक्ष और न्यायपालिका के नेता का कहना हैए केंद्र एकतरफा रूप से चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति करता है।