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अरावली विवाद में सुप्रीम कोर्ट की एंट्री, स्वत: संज्ञान लेकर 3 जजों की बेंच को सौंपा केस, सोमवार को होगी सुनवाई

Aravalli Hills Controvers: अरावली हिल्स को लेकर छिड़ा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, लेकिन मामले में सुप्रीम कोर्ट खुद संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही है और यह सुनवाई सोमवार को होगी. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी करके पर्वतमाला में खनन पर रोक भी लगा दी है.

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केंद्र सरकार ने अरावली पर्वतमाला की नई परिभाषा निर्धारित की है.

Aravalli Hills Controversy: अरावली की पहाड़ियों को लेकर छिड़े विवाद में अब सुप्रीम कोर्ट की एंट्री हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में स्वत: संज्ञान लिया है और 3 जजों की बेंच को मामला सौंपा है. सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस एजी मसीह की बेंच मामले की सुनवाई करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला में खनन के लिए नए पट्टों पर रोक लगा दी है. यह रोक तब तक रहेगी, जब तक कि खनन के लिए प्रबंधन योजना तैयार नहीं हो जाती.

यह भी पढ़ें: अरावली को लेकर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, राज्यों को दो टूक-खनन के नए पट्टे की नहीं मिलेगी मंजूरी

केंद्र सरकार ने तय की पर्वतमाला की नई परिभाषा

बता दें कि हाल ही केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की सिफारिश पर सुप्रीम कोर्ट ने दुनिया की सबसे पुरानी और 700 किलोमीटर लंबी अरावली हिल्स की नई परिभाषा तय की थी. इसमें कहा गया था कि 100 मीटर या उससे ज्यादा ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही अरावली की पहाड़ियां माना जाएगा. बाकी पहाड़ी हिस्से को हटा दिया जाएगा. हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई परिभाषा से पर्वतमाला को कोई खतरा नहीं होगा, लेकिन फिर भी नई परिभाषा का विरोध किया जा रहा है.

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पर्वतमाला का 90 प्रतिशत हिस्सा खत्म होने का खतरा

क्योंकि विशेषज्ञों का कहना है कि नई परिभाषा के बाद अरावली के 90 प्रतिशत हिस्से को हटाया जा सकता है. केंद्र सरकार ने अरावली पर्वतमाला के वैज्ञानिक महत्व को जाने बिना, सार्वजनिक सलाह लिए बिना नई परिभाषा तय की है, जिससे हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में फैले अरावली के बड़े हिस्से खनन के खतरे में पड़ सकते हैं. यह पर्वतमाला दिल्ली और इससे सटे नोएडा को राजस्थान के रेगिस्तान की धूल-मिट्टी से बचाती है, लेकिन इसे ध्यान में रखे बिना फैसला किया गया.

यह भी पढ़ें: अरावली को ‘बचाने’ नहीं ‘बेचने’ की तैयारी? गहलोत का बड़ा आरोप, बोले- केंद्र की मंशा हुई उजागर

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विशेषज्ञों का कहना है कि अरावली पर्वतमाला का एरिया कम होने से अवैध खनन बढ़ेगा. रेगिस्तान का विस्तार और ज्यादा होगा. भूजल स्तर गिरने से पानी की कमी होगी. रेगिस्तान की धूल-मिट्टी दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा को भी प्रदूषित करेगी. जैव विविधता का विनाश होगा और गर्मी बढ़ेगी.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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