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चीन-पाकिस्तान की ‘हरकत’ के लिए प्लान, स्पेस टेक्नोलॉजी से सीमा पर नजर रखने की तैयारी

Space Technology: स्पेस टेक्नोलॉजी में भारत अब अमेरिका, रूस और चीन के बराबर पहुंच चुका है। अंतरिक्ष विभाग के राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने ये दावा किया है। जितेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि आने वाले समय में चाहे वह एलएसी हो या फिर एलओसी यानी दूसरे देशों के साथ लगती सीमा की सुरक्षा भी […]

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Space Technology: स्पेस टेक्नोलॉजी में भारत अब अमेरिका, रूस और चीन के बराबर पहुंच चुका है। अंतरिक्ष विभाग के राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने ये दावा किया है। जितेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि आने वाले समय में चाहे वह एलएसी हो या फिर एलओसी यानी दूसरे देशों के साथ लगती सीमा की सुरक्षा भी स्पेस टेक्नोलॉजी के सहारे की जा सकेगी।

रुकेगी घुसपैठ

बता दें कि सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भारत सरकार बीएसएफ के साथ मिलकर पाकिस्तान बॉर्डर पर इसको लेकर एक पायलट प्रोजेक्ट भी चला रही है। फिलहाल ये काफी सफल है। घुसपैठ जैसी हल्की हरकत पर भी आसमान से सीधी नजर रखी जा सकती है, जिससे घुसपैठ की कोशिश को समय रहते पुख्ता तरीके से रोका जा सकता है। भविष्य में इसे सीमा की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

चंद्रयान-3 से आम लोगों को जुड़ाव

इतना ही नहीं, चंद्रयान 3 मिशन के मुद्दे पर भी बात करते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि मोदी सरकार में हमने स्पेस मिशन को भी आम जनता के लिए खोला है, जिससे चंद्रयान मिशन से आम आदमी भी जुड़ा हुआ महसूस करता है। पीएम मोदी ने श्रीहरिकोटा के द्वारा 4 साल पहले खोल दिए। इसका परिणाम ये है कि आज हमारे पास 150 से अधिक स्टार्टअप हैं।

रेवेन्यू में हुआ इजाफा

मोदी सरकार जियो स्टेशन पॉलिसी लाई। आज हमारे पास रिसोर्स ज्यादा हैं। रूस के मिशन का कॉस्ट बहुत ज्यादा था। चंद्रयान मिशन को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस मिशन के जरिए हम पहली बार साउथ पोल पर जा रहे हैं। हमारे मिशन का खर्च मात्र 600 करोड़ रुपये है, जबकि मोदी सरकार आने के बाद से स्पेस क्षेत्र से 400 मिलियन की कमाई की। मतलब हमारा स्पेस रेवेन्यू भी काफी बढ़ गया है। इतना ही नहीं, उन्होंने मंगलयान के 23 अगस्त की लैंडिंग के मुद्दे पर कहा कि पिछली बार हमारा मिशन फेल हुआ था। हमने उससे बहुत कुछ सीखा और इस सीख को इस मिशन में हमने पूरा इस्तेमाल किया है। फाइनल स्टेज पर लैंडिंग में स्पीड काफी महत्वपूर्ण हो जाता है, लेकिन हमे पूरी उम्मीद है कि हम इसमें सफल रहेंगे।

आगे की क्या है योजना

मंगलयान की सफलता के बाद भारत का स्पेस मिशन गगनयान में लगेगा। इसी साल सितंबर महीने में अनमैन गगनयान भेजा जाएगा, जो कुछ घंटे तक स्पेस में रहेगा। उसके बाद इस साल के आखिर में या अगले साल के शुरुआत में वायुमित्र रोबर्ट गगनयान के जरिए भेजा जाएगा। अगर सब ठीक रहा तो 2024 के मिड में मैन मिशन होगा।
स्पेस क्षेत्र में भारत टॉप चार में 
सरकार का ये भी दावा है कि स्पेस के क्षेत्र में भारत ने पिछले दस साल में काफी तरक्की की है। अब दुनिया स्पेस के क्षेत्र में हमें देख रहा है। अमेरिका ने भी अपने स्पेस मिशन में हमें शामिल करने के लिए आग्रह किया है।  

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