असम कांग्रेस के पूर्व प्रमुख भूपेन कुमार बोरा ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना इस्तीफा सौंप दिया, लेकिन कुछ घंटों बाद ही उन्होंने इसे वापस ले लिया. इससे पहले, न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि खड़गे को लिखे अपने लेटर में बोरा ने लिखा था कि पार्टी लीडरशिप उन्हें “नजरअंदाज” कर रही है और स्टेट यूनिट में उन्हें उनका हक नहीं दिया जा रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेता गौरव गोगोई, भंवर जितेंद्र सिंह और प्रद्युत बोरदोलोई, रायजोर डोल के चीफ अखिल गोगोई के साथ, भूपेन बोरा से बातचीत करने और उन्हें पार्टी में बने रहने के लिए मनाने के लिए गुवाहाटी में उनके घर गए.
जैसे ही बोरा के इस्तीफे की खबर फैलने लगी, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उन्हें “असम कांग्रेस पार्टी का आखिरी हिंदू नेता” बताते हुए कहा कि वह मंगलवार शाम को उनके घर जाएंगे.
सरमा ने कहा, ‘तीन साल पहले, हम भूपेन बोरा का स्वागत करने और उन्हें एक सुरक्षित सीट देने के लिए तैयार थे.’
सरमा ने आगे दावा किया कि जब से उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा असम कांग्रेस चीफ गौरव गोगोई के पाकिस्तान से लिंक हैं, तब से जमीनी स्तर के “हिंदू कांग्रेस नेताओं” की एक लहर उनके साथ जुड़ने लगी है. उन्होंने यह भी अनुमान लगाया कि अगले दो हफ़्ते में करीब पांच और MLA पार्टी बदल लेंगे.
सरमा ने कहा, ‘असम में कांग्रेस की हालत बहुत खराब है. कैंडिडेट चुनने के लिए तीन ऑब्जर्वर यहां आए हैं. उन्हें माइनॉरिटी कम्युनिटी का एक MLA दिया गया है. हालात सच में बहुत खराब हैं. असम में कांग्रेस के कई जिला ऑफिस में मीटिंग एक खास कम्युनिटी की धार्मिक प्रार्थना से शुरू होती हैं. असम में कांग्रेस तेजी से बदल रही है. लोग इसे नोटिस कर रहे हैं. भूपेन बोरा का इस्तीफा एक सिंबॉलिक मैसेज है कि कांग्रेस ने अपना आखिरी हिंदू लीडर खो दिया है.’
बोरा 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस के प्रेसिडेंट रहे, जिसके बाद पिछले साल गौरव गोगोई ने उनकी जगह ली. दो बार के MLA बोरा ने गुवाहाटी में रिपोर्टर्स को बताया कि उन्होंने सुबह 8 बजे पार्टी हाईकमान को अपना इस्तीफा ईमेल कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने फैसले के पीछे के कारण बताए.
उन्होंने कहा, ‘मैं इससे ज़्यादा कुछ नहीं कहना चाहता. मैं सही समय पर मीडिया वालों को बुलाऊंगा और सारी जानकारी दूंगा. मैं कुछ नहीं छिपाता और कोई भी कदम चुपके से नहीं उठाऊंगा.’
बोरा के इस्तीफे की खबरों के बीच, दूसरी पार्टियों के कई नेता उनके घर पहुंचे. पत्रकारों से बातचीत में बोरा ने कहा कि रायजोर पार्टी के अखिल गोगोई समेत कई नेताओं ने उनसे संपर्क किया था.
बोरा ने कहा कि उन्होंने ‘किसी खास व्यक्ति या किसी पर्सनल वजह से पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है.’
उन्होंने कहा, ‘मैंने 32 साल तक कांग्रेस की सेवा की है, और मैं पार्टी के भविष्य को लेकर परेशान हूं. मैंने पार्टी हाईकमान को भेजे गए इस्तीफे में अपने कारणों के बारे में डिटेल में बताया है.’
असम में कांग्रेस के अंदर मतभेद के बीज लगभग एक साल पहले ही पड़ गए थे, जब पार्टी की कमान राहुल गांधी के विश्वासपात्र गौरव गोगोई को सौंप दी गई थी.
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