नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अडानी समूह के खिलाफ हिंडनबर्ग रिपोर्ट की जांच करने के लिए सेबी को तीन महीने का समय दिया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी पर्दीवाला की अगुवाई वाली पीठ ने सेबी को तीन महीने का समय दिया। सेबी ने विस्तृत जांच के लिए 6 महीने का समय मांगी थी।
कोर्ट ने कहा कि सेबी को जांच के लिए 14 अगस्त 2023 तक का समय दिया जाता है। अदालत ने यह भी कहा कि मामले को जुलाई में सूचीबद्ध किया जाएगा और विशेषज्ञ समिति से अनुरोध किया कि वह अदालत की सहायता करना जारी रखे। कोर्ट ने कहा कि विशेषज्ञ समिति इस बीच और विचार-विमर्श कर सकती है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने SC को सूचित किया है कि सेबी जांच करने के लिए समय बढ़ाने की मांग कर रहा है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए छह महीने की जरूरत है। हाल ही में दायर एक प्रत्युत्तर में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय को अवगत कराया कि बाजार नियामक 2016 से पहले से ही अडानी समूह की कंपनियों की जांच कर रहा है, यह तथ्यात्मक रूप से निराधार है।
सेबी ने एक प्रत्युत्तर हलफनामा दायर किया है
अडानी ग्रुप पर हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट से संबंधित एक याचिका के जवाब में सेबी ने एक प्रत्युत्तर हलफनामा दायर किया है। सेबी ने छह महीने की अवधि के लिए यूएस शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा रिपोर्ट में जांच समाप्त करने के लिए विस्तार की मांग की थी। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को मौखिक रूप से टिप्पणी की है कि वे सेबी को जांच के लिए समय देंगे, लेकिन छह महीने के लिए नहीं। वे जांच के लिए तीन महीने का समय बढ़ा सकते हैं।
लेनदेन अत्यधिक जटिल हैं
सेबी ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट में संदर्भित 12 लेनदेन से संबंधित जांच और जांच के संबंध में प्रथम दृष्टया यह नोट किया गया है कि ये लेनदेन अत्यधिक जटिल हैं और कई न्यायालयों में कई उप-लेनदेन हैं। इन लेनदेन की एक कठोर जांच कई घरेलू और साथ ही अंतरराष्ट्रीय बैंकों के बैंक स्टेटमेंट, लेन-देन में शामिल तटवर्ती और अपतटीय संस्थाओं के वित्तीय विवरण, अन्य सहायक दस्तावेजों के साथ संस्थाओं के बीच किए गए अनुबंधों और समझौतों, यदि कोई हो, सहित विभिन्न स्रोतों से डेटा / सूचना के मिलान की आवश्यकता होगी।
अडानी समूह हुआ भारी नुकसान
बता दें कि 2 मार्च को शीर्ष अदालत ने पूंजी बाजार नियामक सेबी को हिंडनबर्ग रिपोर्ट के मद्देनजर अडानी समूह द्वारा प्रतिभूति कानून के किसी भी उल्लंघन की जांच करने का निर्देश दिया। जिसके कारण अडानी समूह के बाजार मूल्य के USD140 बिलियन से अधिक का भारी नुकसान हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने 2 मार्च को अडानी समूह की कंपनियों पर हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट से उत्पन्न मुद्दे पर एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया।
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