इस समय पूरे देश की निगाहें राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर है। गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य पर कर्तव्य पथ पर शानदान परेड निकाली जाने वाली है। इसमें सेना की ताकत और शौर्य का प्रदर्शन होगा। इस छड़ को देखकर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। सेना की परेड के साथ ही कर्तव्य पथ पर राज्यों और विभागों की झांकियों भी निकलेंगी। इसके जरिए आधुनिक भारत, विकसित होता भारत, भारतीय मौलिक और संस्कृति का प्रदर्शन किया जाता है। लेकिन झांकियों की यह परेड केवल कर्तव्य पथ तक सीमित नहीं रहती है। साथ ही परेड के बाद इन झांकियों का क्या होता है। बेहद दिलचस्प है, आइए विस्तार से जानते हैं।
26 जनवरी 1950 को देश में संविधान लागू हुआ था। पूर्ण रूप से गणतंत्र बनने पर पहली बार देश में गणतंत्र दिवस मनाया गया था। पहली बार में राज्यों की झांकियां निकालने की परंपरा नहीं थी। तीन साल बाद यानी साल 1953 में गणतंत्र दिवस की परेड में पहली बार राज्य की झांकियों को शामिल किया गया। इस बार भारत 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। गणतंत्र दिवस परेड में भारत अपनी सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और तकनीकी प्रगति का खूब प्रदर्शन करेगा।
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बता दें कि 26 जनवरी के मौके पर परेड रायसीना हिल्स से शुरू होती है। इसके बाद यह कर्तव्य पथ पर आती है। इसी पथ से होते हुए सीधे इंडिया गेट तक आती है। लेकिन परेड यहीं खत्म नहीं होती है। इंडिया गेट के बाद परेड लाल किले की ओर मुड जाती है। यहीं पर परेड का सफर पूरा होता है। परेड करीब 2 घंटे तक होती है। परेड के माध्यम से पूरी दुनिया भारत की शक्ति प्रदर्शन देखती है। साथ ही देश की जनता में देशभक्ति के भाव सिर चढ़कर बोलता है। इस बार परेड में करीब 30 झांकियां शामिल होंगी।
परेड के बाद झांकियों का क्या होता है?
आपको लगता होगा कि परेड के बाद झांकियों को किसी स्टोर रूम में रखवा दिया जाता होगा या डिस्पोज करा दिया जाता होगा, लेकिन ऐसा नहीं है। देशवासियों का मान बढ़ाने वाली झांकियों के लिए खास प्लान होता है। परेड के बाद झांकियों को कई श्रेणी में पुरस्कार दिया जाता है। इसमें सर्वोत्तम झांकी, सर्वोत्तम राज्य झांकी, सर्वोत्तम केंद्र शासित प्रदेश झांकी आदि। विजेता झांकियों को रक्षा मंत्रालय पुरस्कार से सम्मानित करता है। इसके बाद अवॉर्ड मिलने की खुशी में राज्य उस झांकी की अपने राज्य में प्रदर्शनी लगाता है। इसके अलावा पुरस्कार से वंचित झांकियों को भी उनके मूल राज्य में वापस भेज दिया जाता है।
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