लोकसभा में केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और बजट की दिशा पर तीखे सवाल खड़े किए. राहुल गांधी ने कहा कि आज के दौर में अमेरिका और चीन के बीच जो मुकाबला चल रहा है, उसमें सबसे कीमती चीज भारत का डेटा है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका को दुनिया की महाशक्ति बने रहना है और अपने डॉलर की कीमत को बचाना है, तो उसके लिए भारतीय डेटा ही सबसे बड़ी चाबी है. राहुल ने जोर देकर कहा कि हमें अपने डेटा को हर हाल में सुरक्षित रखना होगा क्योंकि विदेशी ताकतें इसे चुराने की ताक में बैठी हैं.
मार्शल आर्ट के दांव-पेंच से समझाया राजनीति का खेल
अपनी स्पीच की शुरुआत में राहुल गांधी ने मार्शल आर्ट 'जिजित्सु' का जिक्र करते हुए एक दिलचस्प उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि जिस तरह मार्शल आर्ट में ग्रिप और चोक यानी पकड़ और दबाव साफ दिखता है, राजनीति में वह नजर नहीं आता. राजनीति में कहां जोर पड़ रहा है और कहां गला घोंटा जा रहा है, यह समझना मुश्किल होता है. उन्होंने आर्थिक सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया में अब अमेरिका आधारित सिस्टम को रूस और चीन से कड़ी चुनौती मिल रही है. ऐसे खतरनाक समय में ऊर्जा और वित्त को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन बजट में इन चुनौतियों से निपटने का कोई ठोस ब्लूप्रिंट नहीं है.
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देश की तीन बड़ी ताकतों को बचाने की जरूरत
राहुल गांधी ने भाषण में भारत की तीन मुख्य ताकतों का जिक्र किया जिनमें डेटा, किसान और ऊर्जा शामिल हैं. उन्होंने कहा कि हमारे किसान देश को अन्न देकर आत्मनिर्भर बनाते हैं और ऊर्जा के बिना आधुनिक विकास मुमकिन नहीं है. राहुल के मुताबिक बजट इन खतरों को पहचानता तो है कि भू-राजनीतिक स्थिति बिगड़ रही है, लेकिन समाधान देने में पूरी तरह नाकाम रहा है. उन्होंने इस बजट को एक साधारण बजट करार देते हुए कहा कि इसमें भविष्य की लड़ाइयों और एआई (AI) जैसी तकनीक से पैदा होने वाले खतरों से सुरक्षा के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं किए गए हैं.