Rozgar Mela: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को 70 हजार से अधिक युवाओं को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नियुक्ति पत्र दिए। बीते 9 महीने में केंद्र सरकार का ये 7वां रोजगार मेला है, जो देश के 44 स्थानों पर लगाया गया है। 13 केंद्रीय मंत्री भी रोजगार मेले का हिस्सा बने हैं। केंद्र सरकार का दावा है कि अब तक 4.33 लाख लोगों को नौकरी दी जा चुकी है।
रोजगार मेले के जरिए पीएम मोदी ने युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ‘आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। देश विकास के पथ पर चल रहा है, ऐसे में सरकारी कर्मचारी के रूप में काम करने का अवसर मिलना बहुत सम्मान की बात है। इस देश के लोगों ने भारत को एक विकसित देश बनाने का संकल्प लिया है। अगले 25 साल भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।’
सत्ता के स्वार्थ में सिर्फ बर्बादी होती है
अर्थव्यवस्था के विस्तार में हमारे बैंकिंग सेक्टर की बहुत बड़ी भूमिका होती है। आज भारत उन देशों में से एक है, जहां का बैंकिंग सेक्टर सबसे मजबूत माना जाता है। लेकिन 9 वर्ष पहले ऐसी स्थिति नहीं थी। जब सत्ता का स्वार्थ राष्ट्रहित पर हावी होता है, तब किसी बर्बादी होती है, कैसा विनाश होता है, इसके कईं उदाहरण देश में है। हमने सरकारी बैंकों के मैनेजमेंट को सशक्त किया। हमने देश में छोटे-छोटे बैंकों को जोड़कर बड़े बैंकों का निर्माण किया। हमने सुनिश्चित किया है कि बैंक में लोगों की 5 लाख रुपए तक की राशि कभी डूबे।
पहले ताकतवर नेता अपने चहेतों को दिलाते थे लोन
पीएम मोदी ने कहा कि 9 साल पहले ये फोन बैंकिंग मेरे और आपके जैसे सामान्य नागिरकों के लिए नहीं था। उस समय एक खास परिवार के करीबी, कुछ ताकतवर नेता बैंक को फोन कर अपने चहेतों को हजारों करोड़ रुपए का लोन दिलवाया करते थे। ये लोन कभी चुकाया नहीं जाता था। ये फोन बैंकिंग घोटाला पिछली सरकार के सबसे बड़े घोटालों में से एक था।
बैंकों को लूटने वालों की जब्त की संपत्ति जब्त
पीएम ने कहा कि सरकार ने बैंकरप्सी कोड जैसे कानून बनाए, ताकि अगर कोई कंपनी बंद हो तो बैंकों का कम से कम नुकसान हो। इसके साथ ही हमने गलत काम करने वालों पर शिकंजा भी कसा। बैंकों को लूटने वालों की संपत्ति जब्त कर ली। जिन सरकारी बैंकों की चर्चा हजारों करोड़ के नुकसान के लिए होती थी, एनपीए के लिए होती थी, आज उनकी चर्चा रिकॉर्ड प्रॉफिट के लिए हो रही है।
बैंकर्मियों ने दिन-रात किया परिश्रम
गरीबों का बैंकों में जन-धन खाता खुले, इसके लिए दिन-रात एक कर दिया। आज 50 करोड़ जनधन खाते हैं। इसके पीछे बैंक कर्मियों का कठिन परिश्रम और उनका सेवाभाव है। इन्हीं बैंककर्मियों की मदद से कोरोनाकाल में करोड़ों महिलाओं के खाते में सीधे पैसे ट्रांसफर सरकार कर पाई।
जानें कब-कब लोगों को मिली नौकरी
22 अक्टूबर 2022- 75 हजार से अधिक नियुक्ति पत्र दिए।
22 नवंबर 2022- 71 हजार से अधिक लोगों को नौकरी मिली।
20 जनवरी 2023- 71 हजार से ज्यादा नियुक्ति पत्र दिए।
13 अप्रैल 2023- 71 हजार से अधिक लोगों को नियुक्ति पत्र मिले।
16 मई 2023- 70 हजार से ज्यादा लोगों को नौकरी मिली।
13 जून 2023- 70 हजार से ज्यादा लोगों को जॉब मिली।
इन विभागों में युवाओं को मिली नौकरी
देश भर से युवाओं का चयन राजस्व विभाग, वित्तीय सेवा विभाग, डाक विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, जल संसाधन विभाग, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग और गृह मंत्रालय सहित विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में हुआ है।
यह भी पढ़ें: Saamana Editorial: क्या एजेंडा टोली मणिपुर फाइल्स भी बनाएगी?
संबंधित खबरें
हिरासत से छूटे राहुल गांधी, पोस्ट में लिखा-कोई देशद्रोही नहीं बचेगा
6 hrs agoदिल्ली-NCR और उत्तर भारत में कांपी धरती, उत्तराखंड में 4.9 तीव्रता का भूकंप
7 hrs agoत्योहार से पहले कर्मचारियों को DA का तोहफा, त्रिपुरा सरकार ने 3% बढ़ाया
7 hrs agoचुनाव आयोग का आया बयान, राहुल गांधी के प्रस्ताव को कहा प्रोटोकॉल के खिलाफ
8 hrs agoआकाशवाणी भवन से पहले वो 7 मौके, जब-जब हिरासत में लिए गए राहुल गांधी?
8 hrs agoहिरासत में लिए गए प्रियंका गांधी-राहुल गांधी, आकाशवाणी भवन से हटाए नेता
9 hrs agoPM मोदी के नेतृत्व को 25 वर्ष पूरे, केंद्रीय मंत्रिमंडल से प्रस्ताव पारित
9 hrs agoकौन हैं एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित? जिन्हें बनाया गया भारतीय वायुसेना का चीफ
11 hrs ago'चुनाव आयोग से मिलकर रहेंगे', आकाशवाणी भवन के पास धरने पर डटे राहुल गांधी
11 hrs agoIMD Update: पश्चिमी विक्षोभ से बदलेगा मौसम, दिल्ली-NCR में गिरेगा तापमान
11 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines