PM Modi Canada visit 2025: पीएम मोदी जी7 समिट में हिस्सा लेने के लिए कनाडा पहुंच चुके हैं। इस दौरान पीएम कई वैश्विक नेताओं से समिट के इतर भी मुलाकात करेंगे। इसमें इमैनुएल मैक्रो, शिगेरु इशिबा, एंथनी अल्बनीज, कीर स्टारमर, फ्रेडरिक मर्ज और कनाडा के पीएम मार्क कार्नी शामिल हैं। पीएम मोदी का यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। भारत के पिछले कुछ वर्षों में कनाडा से रिश्ते काफी खराब रहे हैं। ऐसे में नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से उनकी मुलाकात सबसे अहम होगी। 2023 में खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते काफी खराब हो गए थे। ऐसे में मार्क कार्नी से उनकी मुलाकात काफी अहम रहने वाली है।
दुनिया को सिखाएंगे आतंकवाद का ककहरा
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पीएम मोदी की यह पहली विदेश यात्रा है। पीएम मोदी साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया की यात्रा पर हैं। इसमें से वे साइप्रस की यात्रा पूरी कर कनाडा पहुंच चुके हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को मिला वैश्विक समर्थन कई मायनों में मिला जुला रहा। कई यूरोपीय देश भारत के साथ आतंकवाद के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर चलते दिखे, तो कई देशों ने तनाव को लेकर अपनी बात रखी। भारत और पाकिस्तान में सीजफायर के बाद मोदी सरकार ने पहलगाम हमले पर पाकिस्तान की पोल खोलने के लिए 7 प्रतिनिधिमंडल अलग-अलग देशों में भेजे थे।
ऐसे कुटनीतिक लिहाज से यह दौरा कई मायनों में अहम रहने वाला है।
मित्र देशों के साथ बनाएंगे रणनीति
पीएम मोदी जी7 समिट के कई विदेशी राष्ट्राध्यक्षों से द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे। इसमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो, आस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बनीज और जापान के पीएम शिगेरु इशिबा प्रमुख हैं। पीएम इस दौरान तीनों नेताओं को आतंकवाद पर भारत के रूख को समर्थन करने के लिए इन तीनों को धन्यवाद कहेंगे। इस दौरान तीनों देशों के बीच आपसी सहयोग और रणनीतिक और कूटनीतिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है। वहीं कनाडा के पीएम मार्क कार्नी पीएम मोदी से मिलने को लेकर काफी उत्साहित है। वे इस दौरान दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलाने का काम कर सकते हैं।
इन मुद्दों पर रखेंगे बात
पीएम मोदी आतंकवाद के अलावा जलवायु परिवर्तन, इजराइल-ईरान संघर्ष, उर्जा सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन जैसे मुद्दों पर अन्य देशों से चर्चा करेंगे। इसके अलावा मेक इन इंडिया के जरिए पीएम भी तीसरी दुनिया के देशों को अपनी ओर आकर्षित कर सकते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की हथियार प्रणाली का लोहा पूरी दुनिया ने माना, ऐसे में पीएम मोदी दुनिया को स्वदेशी हथियारों की ओर आकर्षित कर सकते हैं।
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बता दें कि भारत जी7 का सदस्य देश नहीं है। ऐसे में अगर भारत बार-बार जी7 मीटिंग में शामिल हो रहा है तो वह भारत की राजनयिक साख बढ़ाने वाला कदम है। दुनिया में भारत अब चौथे नंबर की अर्थव्यवस्था है, ऐसे में कार्नी या कोई अन्य वैश्विक नेता अब भारत को नजरअंदाज नहीं कर सकता है। क्योंकि भारत न सिर्फ सप्लाई चैन में अहम किरदार है बल्कि खाद्य सुरक्षा और स्वदेशी हथियारों में उसकी आत्मनिर्भरता दुनिया के लिए किसी हैरानी से कम नहीं है।
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