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46 साल बाद मिला 'इंसाफ'; पेंशन को लेकर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, मामला सबक भी सिखाएगा

Pension Case Judgement: 46 साल से हक की लड़ाई लड़ रही थी। अब जाकर इंसाफ मिला। हाईकोर्ट ने पेंशन से जुड़े केस में विधवा महिला के हक में फैसला सुनाया, जानिए मामला…

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Pension Case Judgement

Orissa High Court Judgement In Pension Case: 46 साल से हक की लड़ाई लड़ रही थी। अब जाकर इंसाफ मिला। हाईकोर्ट ने पेंशन से जुड़े केस में विधवा महिला के हक में फैसला सुनाया। अब उसे पेंशन मिलेगी, लेकिन विशेष बात यह है कि पति की मौत के 46 साल बाद पेंशन मिलेगी और वह इस समय 91 साल की हो चुकी है। इस उम्र में वक्त का कुछ पता नहीं चलता, लेकिन महिला को जीत का संतोष है। मामला उड़ीसा का है। हाईकोर्ट ने केंद्रपाड़ा जिला कलेक्टर को महिला को पारिवारिक पेंशन देने का निर्देश दिया है। महिला को राज्य अधिकारियों ने पेंशन देने से इनकार कर दिया था। उनका दावा था कि वह पेंशन के अयोग्य थी, क्योंकि पेंशन उसके पति की मृत्यु के बाद शुरू की गई थी।

 


अगस्त 1977 में हुई थी महिला के पति की मौत

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न्यायमूर्ति बिरजा प्रसन्ना सतपथी की एकल न्यायाधीश पीठ ने महिला के मृतक पति की सेवानिवृत्ति की तारीख को ध्यान में रखते हुए उसके पक्ष में फैसला सुनाया। साथ ही कलेक्टर को 2 महीने के अंदर पेंशन जारी करने का आदेश दिया। महिला अपने बेटे, बहू और पोते-पोतियों के साथ केंद्रपाड़ा में रहती है। उसका नाम हारा साहू है। उसके पति बेनुधर साहू कासोती में रत्नाकर मिडिल इंग्लिश स्कूल में सहायक शिक्षक थे। 46 साल पहले 26 अगस्त 1977 को उनकी मृत्यु हो गई थी। हारा ने 1991 से स्कूल के साथ-साथ जन शिक्षा अधिकारियों के समक्ष पारिवारिक पेंशन के लिए कई आवेदन दायर किए थे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। केंद्रपाड़ा कलेक्टर ने आवेदन अस्वीकार कर दिया। निराश होकर हारा ने 19 अक्टूबर को हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

2 महीने के अंदर पेंशन जारी करने के आदेश

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य अधिकारियों ने पेंशन देने में आनाकानी की, क्योंकि महिला पारिवारिक पेंशन के लिए पात्र नहीं थी, क्योंकि यह उसके पति की मृत्यु के बाद शुरू की गई थी। हालांकि न्यायमूर्ति सतपथी ने यह मानते हुए राहत दी कि बेनुधर की मृत्यु 1977 में हुई थी। सामान्य स्थिति में वह 1983 में सेवानिवृत्त होते। उन्होंने कलेक्टर को आदेश की प्रति जारी होने की तारीख से 2 महीने के भीतर पेंशन राशि जारी करने का आदेश दिया। हारा देवी अब 91 वर्ष की हैं और अपने इकलौते बेटे 60 वर्षीय सेवानिवृत्त मत्स्य विभाग कर्मचारी हैं। वे बहू और 3 पोते-पोतियों के साथ केंद्रपाड़ा के पालेई डेराकुंडी में रहती हैं।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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