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सड़क हादसों को लेकर गडकरी का बड़ा ऐलान, डेढ़ लाख देगी राज्य सरकार, ‘राहवीरों’ को मिलेंगे 25 हजार

नितिन गडकरी 27 राज्यों की मंत्री बैठक में शामिल हुए. जिसमें कैशलेश ट्रीटमेंट, किसी भी राज्य में दुर्घटना होनें पर सरकार 1.5 लाख की राशि देगी. दुर्घटना में घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले को 25 हजार की राशि दी जाएगी. उनको राहवीर कहा जाएगा. पढ़ें दिल्ली से प्रशांत देव की रिपोर्ट.

नितिन गडकरी 27 राज्यों की मंत्री बैठक में शामिल हुए. जिसमें कैशलेश ट्रीटमेंट, किसी भी राज्य में दुर्घटना होनें पर सरकार 1.5 लाख की राशि देगी. दुर्घटना में घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले को 25 हजार की राशि दी जाएगी. उनको राहवीर कहा जाएगा.

आज देश के 27 राज्यों के परिवहन मंत्रियों की उपस्थिति में एक अहम राष्ट्रीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें सड़क सुरक्षा, परिवहन सुधार और नागरिक सुविधाओं से जुड़े 12 प्रमुख एजेंडा बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा हुई. बैठक का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी, पीड़ितों को त्वरित राहत और परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित व आधुनिक बनाना रहा.

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बैठक का प्रमुख एजेंडा

बैठक में जिन 12 विषयों पर चर्चा हुई, उनमें शामिल हैं, कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम, हिट एंड रन पीड़ितों को मुआवजा, e-DAR, सड़क सुरक्षा मित्र कार्यक्रम, सड़क सुरक्षा अभियान, जीरो फेटैलिटी डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम, स्क्रैपिंग पॉलिसी, बस बॉडी कोड, दिव्यांगजनों के लिए सुगमता, BNCAP 2.0, ट्रक व बसों में ADAS और मोटर व्हीकल एक्ट में प्रस्तावित संशोधन.

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कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम

बैठक में सभी राज्यों की तैयारियों की समीक्षा की गई और जहां भी कमियां हैं, उन्हें प्रोएक्टिव तरीके से दूर करने का आग्रह किया गया.अब किसी भी सड़क पर दुर्घटना के शिकार सभी पीड़ितों को अधिकतम 7 दिनों तक 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा. यह योजना असम, चंडीगढ़, पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा, पुडुचेरी और उत्तर प्रदेश में सफल होने के बाद अब पूरे देश में लागू की जा रही है.

नई ड्राइविंग ट्रेनिंग पॉलिसी

15 जनवरी 2025 को लॉन्च की गई नई ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कीम के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. स्कीम से पहले 7 वर्षों में केवल 41 ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर्स (DTCs) स्थापित हुए थे, जबकि नई स्कीम लागू होने के सिर्फ एक साल में 44 नए DTCs स्थापित किए गए हैं और 87 पाइपलाइन में हैं. इसके अलावा देश में 1,021 DTC, 98 RDTC और 5 IDTR स्थापित करने की आवश्यकता बताई गई।.

हिट एंड रन मामलों में मुआवजा

बैठक में बताया गया कि कई राज्यों में हिट एंड रन मामलों में क्लेम दर्ज नहीं हो पा रहे हैं. 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 1.85 लाख मामले सामने आए, लेकिन केवल 17% क्लेम प्राप्त हुए. सरकार ने राज्यों से इस योजना के बारे में अधिक जागरूकता फैलाने और क्लेम प्रक्रिया को तेज करने का आग्रह किया.

मुआवजा राशि बढ़ाई गई

गंभीर रूप से घायल होने पर 50,000 रुपये.
मृत्यु के मामले में 2 लाख रुपये कर दी गई है.

जीरो फेटैलिटी डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम

सरकार ने देश के 100 सबसे अधिक दुर्घटना-प्रभावित जिलों की सूची जारी की है. इन जिलों में जीरो फेटैलिटी डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम चलाया जाएगा, जिसमें जिला प्रशासन और सभी स्टेकहोल्डर्स के सहयोग से दुर्घटनाओं को कम करने के लिए वैज्ञानिक तरीकों से कम किया जाएगा. नागपुर, उन्नाव और कामरूप जैसे जिलों में इस मॉडल से मौतों में उल्लेखनीय कमी आई है.

दिव्यांगजनों के लिए सुगम परिवहन

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि अब सभी सिटी बसें दिव्यांगजन-फ्रेंडली होंगी. नई बसें लो-फ्लोर होंगी, जिनमें हाइड्रोलिक नी-लिंग सिस्टम, व्हीलचेयर, रैंप, लिफ्ट और पकड़ने के लिए हैंडल की सुविधा अनिवार्य होगी.

बस बॉडी कोड और फॉरेंसिक जांच

पिछले 3 महीनों में 6 बस हादसों में 145 मौतों के बाद बस डिजाइन और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे. संशोधित बस बॉडी कोड के तहत अब बसों का रजिस्ट्रेशन केवल टेस्टिंग एजेंसी से टाइप अप्रूवल के बाद ही होगा.

फॉरेंसिक जांच के आधार पर निर्णय लिया गया कि—

स्लीपर कोच बसें केवल ऑटोमोबाइल कंपनियां ही बनाएंगी.
सभी बसों में फायर डिटेक्शन, इमरजेंसी एग्जिट, लाइटिंग और ड्राइवर ड्राउजीनेस अलर्ट अनिवार्य होंगे.
मोटर व्हीकल एक्ट में प्रस्तावित संशोधन.
आगामी संसद सत्र में मोटर व्हीकल एक्ट में 61 संशोधन प्रस्तावित किए जाएंगे.
इनका उद्देश्य सड़क सुरक्षा, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, नागरिक सेवाओं में सुधार और वैश्विक मानकों के अनुरूप नियम बनाना है.

स्क्रैपिंग पॉलिसी का असर

दिसंबर 2025 तक 3.94 लाख वाहन स्क्रैप किए गए, जिससे-
40,000 करोड़ रुपये GST राजस्व
70 लाख नए रोजगार
CO₂ उत्सर्जन में भारी कमी
और कच्चे माल के पुनः उपयोग को बढ़ावा मिला है.

V2V (व्हीकल-टू-व्हीकल) कम्युनिकेशन

सरकार वाहनों के बीच सीधे संवाद की तकनीक V2V लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
इसके तहत वाहन एक-दूसरे को रियल टाइम जानकारी देकर दुर्घटनाओं में 80% तक कमी ला सकते हैं.
इसके लिए दूरसंचार विभाग के साथ संयुक्त टास्क फोर्स गठित की गई है.


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