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मल्लिकार्जुन खड़गे बोले- अगर पीएम मोदी मणिपुर वीडियो को लेकर नाराज थे, तो सीएम को बर्खास्त कर सकते थे

Manipur Viral Video Case: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वास्तव में मणिपुर की स्थिति से नाराज थे, तो आप सबसे पहले मुख्यमंत्री बीरेन सिंह को बर्खास्त कर सकते थे। एक ट्वीट में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री शुक्रवार को संसद में मणिपुर पर बयान देंगे। […]

Manipur Viral Video Case: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वास्तव में मणिपुर की स्थिति से नाराज थे, तो आप सबसे पहले मुख्यमंत्री बीरेन सिंह को बर्खास्त कर सकते थे। एक ट्वीट में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री शुक्रवार को संसद में मणिपुर पर बयान देंगे। उन्होंने कहा, "भारत आपसे उम्मीद करता है कि आप संसद में एक विस्तृत बयान देंगे, न कि केवल एक घटना पर, बल्कि 80 दिनों की हिंसा पर, जिस पर राज्य और केंद्र में आपकी सरकार बिल्कुल असहाय और पश्चातापहीन दिख रही है।"   और पढ़िए – महिलाओं की भीड़ ने मुख्य आरोपी के घर में लगाई आग सीएम ने दिया ये बयान   मणिपुर की स्थिति पर अपनी पहली सार्वजनिक टिप्पणी में पीएम मोदी ने गुरुवार को हिंसा प्रभावित राज्य में दो महिलाओं को नग्न घुमाने के वीडियो पर गुस्सा जाहिर किया। 4 मई के वीडियो में कुकी समुदाय की महिलाओं को पुरुषों के एक समूह द्वारा नग्न अवस्था में घुमाते और उनके साथ छेड़छाड़ करते हुए दिखाया गया था। एक महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को भी अंजाम दिया गया। वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

पीएम मोदी की टिप्पणी पर कांग्रेस ने साधा था निशाना

उधर, मणिपुर वायरल वीडियो पर पीएम मोदी की टिप्पणी के बाद कांग्रेस ने उनपर निशाना साधा। कांग्रेस ने पीएम मोदी के बयान को ‘बहुत कम, बहुत देर से’ वाला बताया और कहा कि केवल शब्दों से अब काम नहीं चलेगा। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 1800 घंटे से अधिक की अक्षम्य चुप्पी के बाद प्रधानमंत्री ने आखिरकार मणिपुर पर कुल 30 सेकंड तक बात की। कांग्रेस के सीनियर नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री ने मणिपुर में शासन की विफलताओं और मानवीय त्रासदी से ध्यान हटाने का प्रयास किया। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों को नजरअंदाज़ करते हुए उन्होंने मणिपुर की घटना को अन्य राज्यों (खासकर विपक्ष द्वारा शासित राज्यों) में महिलाओं के ख़िलाफ़ हुए अपराधों से तुलना करने की कोशिश की।


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