नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा है कि फरवरी 2012 में केरल तट पर मारे गए मछुआरों और दो अन्य के कानूनी उत्तराधिकारियों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। फरवरी 2012 में केरल तट पर एक नाव पर दो इतालवी नौसैनिकों द्वारा गोलीबारी की घटना हुई थी।
न्यायमूर्ति एमआर शाह की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने 15 जून, 2021 के आदेश में संशोधन किया और 9 में से प्रत्येक मछुआरे को पांच-पांच लाख रुपये देने का निर्देश दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि कैप्टन कम बोट ओनर फ्रेडी को इतालवी सरकार द्वारा भुगतान किए गए 2 करोड़ रुपये में से 1.55 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
10 करोड़ रुपये का भुगतान
इटली ने भारत में दो नौसेना कर्मियों के खिलाफ आपराधिक मामलों को बंद करने के एवज में मुआवजे के रूप में 10 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। एनरिका लेक्सी जहाज पर सवार दो इतालवी मरीन द्वारा 2012 में मारे गए मछुआरों के परिवारों को ये राशि देने की बात कही गई थी। शीर्ष अदालत ने 2021 में दो इतालवी नौसैनिकों के खिलाफ भारत में शुरू की गई सभी आपराधिक कार्यवाही को बंद कर दिया, जिन पर इस घटना में दो मछुआरों की हत्या का आरोप था।
"सेंट एंटनी" के मालिक को 2 करोड़ रुपये दिए जाएं
शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया था कि शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में जमा की गई 10 करोड़ रुपये की राशि को केरल उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया जाए और कुल राशि में से दोनों मृतकों के वारिसों को 4 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाए। साथ ही मछली पकड़ने वाली नाव "सेंट एंटनी" के मालिक को 2 करोड़ रुपये दिए जाएं।
दो मछुआरों की मौत
नाव के मालिक और एक नाबालिग सहित बारह मछुआरे "सेंट एंटनी" पर सवार थे। फायरिंग की घटना में इनमें से दो की मौत हो गई। पीठ को सूचित किया गया कि एक नाबालिग ने आत्महत्या कर ली थी जबकि एक अन्य मछुआरे जॉनसन की कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान मौत हो गई थी।
मुआवजे की मांग
शीर्ष अदालत सात प्रभावित मछुआरों द्वारा दायर एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें घटना के बाद आघात के कारण उन्हें हुई पीड़ा के लिए मुआवजे की मांग की गई थी। फरवरी 2012 में भारत ने एक इतालवी-ध्वज वाले तेल टैंकर एमवी एनरिका लेक्सी पर सवार दो नौसैनिकों पर भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में मछली पकड़ने वाले जहाज पर सवार दो भारतीय मछुआरों की हत्या करने का आरोप लगाया था।