भारत में हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस बड़े उत्साह और भव्य परेड के साथ मनाया जाता है, जिसमें काफी खर्चा भी होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि 1950 में पहला गणतंत्र दिवस मात्र ₹11,093 रुपए में मनाया गया था. ना कोई भव्य मंच, ना भारी सुरक्षा व्यवस्था और ना ही बड़ी परेड, लेकिन उस दिन देश में जो उत्साह और गर्व था, वो ऐतिहासिक बन गया.
ये आज के करोड़ों रुपए के कार्यक्रमों की तुलना में बेहद सादगीपूर्ण, लेकिन भावनाओं से भरपूर रहा. आइए जानते हैं उस ऐतिहासिक दिन की पूरी कहानी.
ये भी पढ़ें: Republic Day 2026: 77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय संघ के नेता होंगे मुख्य अतिथि, क्या है भारत की बड़ी रणनीति?
1950 में गणतंत्र दिवस की शुरुआत
26 जनवरी 1950 को भारत अपने संविधान को अपनाकर एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में खड़ा हुआ. इसी दिन संविधान लागू हुआ और डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति बने. ये दिन केवल एक सरकारी समारोह नहीं था, बल्कि आजाद भारत के नए सफर की शुरुआत थी. आज जब गणतंत्र दिवस परेड पर खर्च करोड़ों में होता है, 1950 में ये बहुत ही साधारण और सीमित था.
सादगी से हुआ था पहला राष्ट्रीय उत्सव
आज के मुकाबले उस समय देश आर्थिक रूप से कमजोर था. आजादी मिले ज्यादा वक्त नहीं हुआ था और देश विभाजन की पीड़ा से उबर रहा था. ऐसे में सरकार ने तय किया कि गणतंत्र दिवस को सादगी और सामाजिक सरोकारों के साथ मनाया जाएगा. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, पहले गणतंत्र दिवस के आयोजन पर कुल ₹11,093 खर्च किए गए. ये रकम मुख्य रूप से स्कूलों, राहत गृहों और सामाजिक संस्थानों में छोटे-छोटे कार्यक्रमों पर खर्च हुई.
बच्चों और महिलाओं पर रहा खास ध्यान
उस समय दिल्ली और आसपास के इलाकों में कई राहत शिविर और महिला आश्रय गृह थे, जहाँ देश विभाजन से प्रभावित लोग रह रहे थे. गणतंत्र दिवस के मौके पर इन जगहों पर विशेष कार्यक्रम हुए. स्कूल के बच्चों को स्मृति चिन्ह और थालियां दी गईं. महिला आश्रय गृहों में फल, मिठाई और छोटे उपहार बांटे गए. गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए सादा भोजन और कार्यक्रम आयोजित किए गए. इन आयोजनों का मकसद दिखावा नहीं, बल्कि ये संदेश देना था कि नया भारत हर नागरिक के साथ खड़ा है.
कैसे ऐतिहासिक बना पहला गणतंत्र दिवस?
1950 में आज जैसी भव्य सैन्य परेड नहीं हुई थी. ना राजपथ पर लंबा जुलूस था और ना ही विदेशी मेहमान. फिर भी ये दिन इसलिए खास था क्योंकि भारत ने खुद को अपने संविधान के तहत शासित देश घोषित किया. उस दिन हिंदुस्तान ने ये दिखा दिया कि लोकतंत्र की ताकत हथियारों या खर्च से नहीं, बल्कि संविधान और जनता के भरोसे से आती है. धीरे-धीरे गणतंत्र दिवस का स्वरूप बदलता गया. परेड, सांस्कृतिक झांकियां और सेना की ताकत का प्रदर्शन इसमें जुड़ता चला गया. आज ये समारोह भारत की सांस्कृतिक विविधता और सैन्य शक्ति का प्रतीक बन चुका है.
ये भी पढ़ें: भारत का एकमात्र गणतंत्र दिवस, जब पाकिस्तान का नेता बना था मुख्य अतिथि; दुनिया भी हुई हैरान
संबंधित खबरें
क्या मोदी कैबिनेट से इस्तीफा देंगे दो मंत्री? राज्यसभा की लिस्ट से नाम गायब
22 mins agoजंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस ने क्यों हटाई नेम प्लेट? अधिकारियों ने बताई वजह
1 hr agoभारत के अस्पतालों में बढ़ता विदेशी निवेश, महंगा इलाज बना बड़ी चिंता
2 hrs agoराहुल ने दिल्ली पुलिस पर साधा निशाना, महिलाओं से बदसलूकी को लेकर मांगा जवाब
3 hrs agoटैक्स अधिकारियों की अरेस्ट पावर क्यों खत्म करना चाहती है केंद्र सरकार?
4 hrs agoभारत-स्विट्जरलैंड की 'दोस्ती' से 10 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार: PM मोदी
4 hrs agoराज्यसभा चुनाव के लिए BJP ने उतारे 8 उम्मीदवार; हरदीप पुरी का टिकट कटा
4 hrs ago99.% ट्रेनें इलेक्ट्रिफाइड, फिर भी डीजल इंजन क्यों नहीं बंद कर सकता रेलवे?
5 hrs agoबदले हुए फॉर्म 6 को मंजूरी हमने नहीं दी, किसने दिया आदेश?: सुप्रीम कोर्ट
5 hrs agoSBI PO Mains का परिणाम कब जारी होगा? जानें कैसे डाउनलोड करें रिजल्ट
5 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines