पड़ोसी देश हो या फिर दुश्मन देश… अगर मुसीबत के वक्त भारतीय सेना को कोई याद करता है तो भारतीय सेना भी दुश्मन की दी हुई चोट को भूलकर मदद के लिए पहुंच जाती है, लेकिन श्रीलंका के साथ भारत के सालों पुराने संबंध हैं और पौराणिक संबंध इससे भी गहरे हैं. हाल ही में श्रीलंका में चक्रवाती तूफान दित्वा ने भयंकर तबाही मचाई थी. भारतीय सेना ने ऑपेरशन सागर बंधु चलाकर श्रीलंका तक मदद पहुचाई थी और मदद आज भी जारी है. इसी मदद के तहत भारतीय सेना के इंजीनियरों ने श्रीलंका में कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए कैंडी में 100-फीट लंबा बेली ब्रिज बनाया है.
ऑपरेशन सागर बंधु के तहत बनाया पुल
इंडियन आर्मी से मिली जानकारी के मुताबिक, यह पुल भारत के ऑपरेशन सागर बंधु के तहत बनाया जा रहा है. इसका मकसद चक्रवाती तूफान दित्वा से तबाह हुए श्रीलंका की मदद करना है. भारतीय रक्षा मंत्रालय के मुताबिक श्रीलंकाई सड़क विकास प्राधिकरण की मदद के लिए बिल्डिंग बनाने के साथ मूलभूत सुविधा के लिए भी काम किया जा रहा है. बेली ब्रिज के बन जाने के बाद बी-492 हाईवे पर टूटा हुआ संपर्क दोबारा बहाल हो जाएगा, क्योंकि इस सड़क मार्ग पर रोजाना हजारों लोग आवाजाही करते थे. अब जब इसका निर्माण पूरा हो जाएगा तो बड़ी राहत आग लोगों को मिल जाएगी.
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50 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता
भारतीय उच्चायोग ने बताया कि भारतीय सेना के इंजीनियर्स श्रीलंका से कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए B-492 हाईवे पर बेली ब्रिज बना रहे हैं. दिसंबर में जब भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर श्रीलंका गए थे तो उन्होंने चक्रवात दित्वा से मची तबाही से श्रीलंका को उबारने के लिए मदद का हाथ बढ़ाया. श्रीलंका में पुनर्निर्माण के लिए 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता का ऑफर दिया है. इस सबंधी एक पत्र प्रधानमंत्री मोदी की ओर से उन्होंने श्रीलंका के प्रधानमंत्री को सौंपा. इसमें बताया गया है कि श्रीलंका को आर्थिक मदद और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए भारत ने ऑपरेशन सागर बंधु चलाया है.
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1100 टन राहत सामग्री श्रीलंका पहुंचाई
विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि ऑपरेशन के तहत श्रीलंका को 1100 टन राहत सामग्री दी गई और करीब 14.5 टन दवाइयां और मेडिकल किट दी गई हैं. श्रीलंका को कुल 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर का रिलीफ पैकेज दिया गया है, जिसमें 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर रियायती लाइन ऑफ क्रेडिट और 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर अनुदान है.