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ढाका की अस्थिरता, बीजिंग की मौजूदगी और दिल्ली की कूटनीति: भारत–बांग्लादेश पर विदेश मामलों पर संसदीय समिति की 33 सिफारिशें

भारत–बांग्लादेश रिश्तों को लेकर संसदीय समिति की नौवीं रिपोर्ट ने भविष्य की नीति दिशा स्पष्ट की है. लोकतंत्र, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को केंद्र में रखकर अहम सुझाव दिए गए हैं.

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भारत बांग्लादेश संबंधों के भविष्य को लेकर विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने अपनी नौवीं रिपोर्ट लोकसभा में पेश की. डॉ. शशि थरूर की अध्यक्षता वाली इस समिति की रिपोर्ट में कुल 33 महत्वपूर्ण टिप्पणियां और सिफारिशें शामिल हैं. रिपोर्ट में लोकतंत्र, सुरक्षा, अल्पसंख्यक संरक्षण, सीमा प्रबंधन, व्यापार, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक संबंधों जैसे अहम मुद्दों का व्यापक और गहन विश्लेषण किया गया है.

द्विपक्षीय रिश्तों को सुदृढ़ रखने पर जोर

समिति ने भारत–बांग्लादेश के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक रिश्तों को रेखांकित करते हुए कहा है कि 1971 की भावना, भूमि सीमा समझौता और समुद्री सीमा समाधान जैसे ऐतिहासिक फैसले दोनों देशों के संबंधों की मजबूत आधारशिला हैं. रिपोर्ट में बांग्लादेश की आंतरिक राजनीतिक चुनौतियों को स्वीकार करते हुए भारत से रचनात्मक, व्यावहारिक और लोकतंत्र समर्थक दृष्टिकोण बनाए रखने की सिफारिश की गई है.

लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनावों पर चिंता

अगस्त 2024 के बाद बांग्लादेश में उभरी राजनीतिक अस्थिरता, चुनावों को लेकर अनिश्चितता और राजनीतिक हिंसा पर समिति ने गंभीर चिंता जताई है. साथ ही, भारत की शांत कूटनीति और गैर-हस्तक्षेप की नीति की सराहना करते हुए सरकार से स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय चुनावों के लिए लगातार प्रोत्साहन देने का आग्रह किया गया है.

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अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर सख्त रुख

रिपोर्ट में बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों, धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने और हिंसा की घटनाओं को चिंताजनक बताया गया है. समिति ने विदेश मंत्रालय से इन मुद्दों को कूटनीतिक प्राथमिकता बनाए रखने और बांग्लादेश सरकार पर त्वरित तथा प्रभावी कार्रवाई के लिए दबाव बनाए रखने की सिफारिश की है.

शेख हसीना के भारत में ठहराव पर मानवीय दृष्टिकोण

पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत में ठहराव को समिति ने भारत की मानवीय, नैतिक और सभ्यतागत परंपरा से जोड़ा है. रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भारतीय धरती से किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी गई और प्रत्यर्पण से जुड़े घटनाक्रमों पर समिति को अवगत कराते रहने की आवश्यकता बताई गई है.

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भारत-विरोधी दुष्प्रचार से निपटने की सलाह

बांग्लादेशी मीडिया और डिजिटल मंचों पर भारत-विरोधी दुष्प्रचार को चुनौती बताते हुए समिति ने विदेश मंत्रालय के भीतर एक समर्पित स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन यूनिट गठित करने की सिफारिश की है, ताकि गलत सूचनाओं का समय रहते और प्रभावी जवाब दिया जा सके.

चीन की बढ़ती मौजूदगी पर सतर्कता

बांग्लादेश में चीन की बढ़ती भूमिका—विशेषकर बंदरगाहों, एयरबेस और रक्षा सहयोग के क्षेत्र में पर समिति ने चिंता जताई है. सिलीगुड़ी कॉरिडोर और बंगाल की खाड़ी से जुड़े भारत के रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार से सतर्क निगरानी और विकास सहयोग के जरिए अपनी स्थिति और मजबूत करने को कहा गया है.

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सीमा प्रबंधन और पूर्वोत्तर सुरक्षा

भारत–बांग्लादेश सीमा पर शेष बाड़बंदी, स्मार्ट सर्विलांस और तकनीकी समाधानों को समिति ने राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा मुद्दा बताया है. साथ ही, पूर्वोत्तर भारत में आतंकवाद और घुसपैठ की चुनौतियों से निपटने के लिए खुफिया सहयोग और समन्वय को और मजबूत करने की सिफारिश की गई है.

राज्यों की भूमिका और समन्वय

समिति ने पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम जैसे सीमावर्ती राज्यों की भूमिका को अहम बताते हुए कहा है कि नीति निर्माण और सीमा प्रबंधन से जुड़े मामलों में केंद्र–राज्य समन्वय को और सक्रिय किया जाना चाहिए.

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व्यापार, कनेक्टिविटी और जल संधि

बांग्लादेश के 2026 में LDC श्रेणी से बाहर होने को ध्यान में रखते हुए समिति ने CEPA समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने, कनेक्टिविटी परियोजनाओं में तेजी लाने और 1996 की गंगा जल संधि के नवीनीकरण को लेकर समय रहते बातचीत शुरू करने की सिफारिश की है.

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कुल मिलाकर, संसदीय समिति की यह रिपोर्ट भारत–बांग्लादेश संबंधों को संतुलित, दूरदर्शी और सुरक्षा-संवेदनशील दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने का स्पष्ट रोडमैप पेश करती है, जिसमें लोकतंत्र, विकास और आपसी विश्वास को केंद्र में रखा गया है.

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