Delhi-NCR Pollution Increasing Agencies Stopped Giving Important Data: दिल्ली सरकार और नौकरशाही के बीच लड़ाई के कारण आईआईटी-कानपुर की ओर से वास्तविक समय स्रोत विभाजन अध्ययन 18 अक्टूबर से रुका हुआ है। उधर, केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत दो अन्य एजेंसियों ने भी प्रदूषण के स्रोतों पर जानकारी साझा करना बंद कर दिया है। बताया गया है कि दिल्ली में प्रदूषण के पीक मौसम से पहले ये सब हो रहा है।
न्यूज साइट टीओआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, पारदर्शिता का आह्वान करते हुए विशेषज्ञों ने कहा है कि स्रोतों पर डेटा प्रदूषण के खिलाफ रणनीति तैयार करने और सार्वजनिक जागरूकता पैदा करने में महत्वपूर्ण है। दो प्रमुख एजेंसियों, वायु गुणवत्ता व मौसम पूर्वानुमान और अनुसंधान प्रणाली (एसएएफएआर) और निर्णय समर्थन प्रणाली ने इस महीने की शुरुआत से सार्वजनिक रूप से डेटा साझा करना बंद कर दिया है।
SAFAR बताता है खेतों में पराली जलने की स्थिति
रिपोर्ट में कहा गया है कि महत्वपूर्ण डेटा हासिल न होने के कारण दिल्ली अपनी खराब हवाई स्थिति से लड़ने में जूझ रहा है। SAFAR की वेबसाइट ने 11 और 12 अक्टूबर को दिल्ली के PM2.5 और आग की गणना में पराली का मुद्दा बताया था, लेकिन 13 अक्टूबर से इसे बंद कर दिया। 2017 से SAFAR खेतों में आग की संख्या और उनके प्रतिशत योगदान पर डेटा और पूर्वानुमान साझा कर रहा है। दिल्ली के PM2.5 का प्रतिशत सर्दियों के मौसम के दौरान हवा की दिशा, हवा की गति और अन्य कारकों के साथ-साथ अन्य प्रदूषण स्रोतों की हिस्सेदारी पर निर्भर करता है।
डीएसएस ने बंद किया डेटा देना
दिल्ली के PM2.5 में स्थानीय स्रोतों और 19 एनसीआर जिलों के स्रोतों के योगदान का अनुमान लगाने वाली डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) ने मंगलवार से जानकारी साझा करना बंद कर दिया है। अक्टूबर 2021 में लॉन्च किया गया DSS डेटा सितंबर से मध्य फरवरी तक उपलब्ध होता था। हालांकि DSS शुरू में इस साल सितंबर से फिर से शुरू होने वाला था, लेकिन यह 17 अक्टूबर को शुरू हुआ और 24 अक्टूबर से बंद कर दिया गया। वेबसाइट का कहना है कि केवल लॉगिन-आईडी वाले लोग ही डेटा तक पहुंच सकते हैं।
समय पर इस डेटा की जरूरत पड़ती है
SAFAR और DSS दोनों भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे का एक हिस्सा हैं, जो केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत आता है। बार-बार प्रयास करने के बावजूद इस मामले पर आईआईटीएम अधिकारियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की कार्यकारी निदेशक (अनुसंधान और वकालत) अनुमिता रॉयचौधरी ने कहा कि वायु प्रदूषण का पूर्वानुमान और वास्तविक समय स्रोत विभाजन मूल्यांकन अधिक विज्ञान आधारित वायु गुणवत्ता प्रबंधन प्रणालियों के लिए आवश्यक प्रमुख वैज्ञानिक उपकरणों में से हैं। समय पर इसकी जरूरत होती है।
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