Rajasthan Election 2023: साल के अंत तक राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसको लेकर पार्टियों ने तैयारियां शुरू कर दी है। कांग्रेस ने गुरुवार को 29 सदस्यीय प्रदेश चुनाव समिति का गठन किया। समिति का अध्यक्ष पार्टी के राज्य प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा होंगे। राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट सदस्य हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रदेश चुनाव समिति के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। पार्टी नेता रघुवीर मीणा, रघु शर्मा, हरीश चौधरी, प्रताप सिंह खाचरियावास, रामेश्वर डूडी, मोहन प्रकाश और लालचंद कटारिया पैनल का हिस्सा हैं।
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गहलोत के दो बड़े करीबियों को नहीं मिली जगह
चुनाव समिति में गहलोत के 2 बड़े समर्थक और राजस्थान के मंत्री शांति धारीवाल और महेश जोशी का नाम सूची में नहीं है। यही दो वह बड़े नाम हैं, जिन्हें कांग्रेस हाईकमान ने अशोक गहलोत के समर्थन में कांग्रेस विधायक दल की समानांतर बैठक करने के कारण अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
दिल्ली में हुई थी पार्टी की अहम मीटिंग
अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर रंधावा, गोविंद सिंह डोटासरा, सचिन पायलट और राज्य के कई विधायकों और मंत्रियों के साथ जुलाई में बैठक हुई थी। बैठक दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में हुई थी। समिति का गठन शीर्ष नेताओं के राय-मशवरे के बाद किया गया है। उस बैठक में सीएम अशोक गहलोत भी शामिल हुए थे।
बैठक के बाद कांग्रेस ने कहा कि वह राजस्थान विधानसभा चुनाव जीत सकती है, बशर्ते एकजुटता हो और अनुशासन न बनाए रखने और पार्टी फोरम के बाहर बोलने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। पार्टी ने यह भी संकेत दिया था कि वह इस साल के अंत में होने वाले चुनावों के लिए मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं करेगी।
सचिन और गहलोत के बीच मनमुटाव खत्म
सचिन पायलट ने एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में स्पष्ट किया था कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सलाह पर अशोक गहलोत के साथ मनमुटाव को खत्म कर दिया है और कहा है कि सामूहिक नेतृत्व ही विधानसभा चुनावों में आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है।
कांग्रेस नेतृत्व, जिसकी नजरें राजस्थान में सरकार को बरकरार रखने पर टिकी हैं। पार्टी ने गहलोत और उनके पूर्व डिप्टी के बीच एक समझौता कराया, जिन्होंने अब यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने का फैसला किया है कि पार्टी रेगिस्तानी राज्य में फिर से सत्ता में लौट आए।