केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी सीआईएसएफ 28 जनवरी से 25 दिन के तटीय साइक्लोथॉन का दूसरा संस्करण आयोजित करेगा. सीआईएसएफ के डीजी प्रवीर रंजन ने आज न्यूज 24 को विशेष जानकारी देते हुए बताया कि सीआईएसएफ औधोगिक क्षेत्र, एयरपोर्ट के अलावा अब तटीय सुरक्षा में भी अपना सहयोग देने जा रही है.
सीआईएसएफ डीजी के मुताबिक बहुत जल्द यानी 28 जनवरी 2026 को तटीय साइक्लोथॉन की शुरुआत 25 दिनों के लिए किया जा रहा है. इसमें ईस्ट और वेस्ट तटों के 6,500 किलोमीटर के इलाके को कवर किया जाएगा और किनारों पर सुरक्षा बढ़ाने का संदेश दिया जाएगा.
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इसके तहत आम लोगों को तस्करी, आर्मस और नशे के कारोबार में जु़ड़े घुसपैठ के बारे में लोगों को जागरुक किया जाएगा. डीजी सीआईएसएफ के मुताबिक तटीय साइक्लोथॉन की शुरुआत का मेन मकसद तटीय समुदायों को राष्ट्रीय सुरक्षा और सतत विकास के प्रयासों से जोड़ना, तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व पर जोर देना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना, स्वस्थ जीवनशैली और राष्ट्रीय एकता का संदेश देना है.
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साइक्लोथॉन का पहला संस्करण मार्च 2025 में आयोजित किया गया था, जब सीआईएसएफ के जवानों ने समुद्र तट के किनारे लगभग 6,500 किलोमीटर की दूरी तय की थी.
सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने कहा साइक्लोथॉन के दूसरे संस्करण का मकसद तटीय आबादी को राष्ट्रीय उद्देश्यों से जोड़ना है. फोर्स इन इलाकों के स्थानीय लोगों को तटीय सुरक्षा के बारे में भी जागरूक करेगी. सीआईएसएफ वंदे मातरम कोस्टल साइक्लोथॉन 202 का आयोजन 28 जनवरी से 22 फरवरी के बीच वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में किया जाएगा.
सीआईएसएफ के मुताबिक इसका थीम सुरक्षित तट, समृद्ध भारत होगा. सीआईएसएफ के जवान भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों के किनारे ग्यारह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपनी साइकिलों पर लगभग 6,500 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश की लगभग 18 प्रतिशत आबादी तटीय जिलों में रहती है. आपको बता दें कि इस तटीय साइक्लोथॉन में भाग लेने के लिए डीजी एनसीसी ने भी सीआईएसएफ से संपर्क करके एनसीसी कैडेट को भी इसमें शामिल करने का अनुरोध किया है.
न्यूज 24 का सवाल कि इस साल अग्निवीर के पहले बैच का कार्यकाल खत्म होने वाला है और जो अग्निवीर सीआईएसएफ में आना चाहते हैं उनकी सीधी एंट्री होगी या फिर उन्हें सेलेक्शन की प्रक्रिया से गुजरना होगा? इस सवाल के जवाब में डीजी प्रवीर रंजन ने बताया कि नौसेना अग्निवीर के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद कुछ अग्निवीरों को भविष्य में CISF की बंदरगाह और समुद्री सुरक्षा में तैनात किया जा सकता है. हम इस दिशा में विचार कर रहे हैं और इसको लेकर एक विस्तृत ब्लूप्रिंट पर काम कर रहे हैं.