BJP Bengal Tripura strategy in Rajasthan MP Chhattisgarh Assembly Elections 2023: मध्यप्रदेश, छतीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इस बार 18 सांसदों को चुनाव मैदान में उतारा है। आखिर भाजपा की रणनीति क्या है? किस तरह भाजपा ने विपक्षी गठबंधन को मात देने लिए एक्शन प्लान तैयार किया है?
सूत्रों की मानें तो भाजपा ने मध्यप्रदेश, छतीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा वाली रणनीति को यूज करने का फैसला किया है। तीनों राज्यों में अब तक जारी प्रत्याशियों की लिस्ट में इसकी झलक भी दिखी है। तीनों चुनावी राज्यों में भाजपा ने अब तक कुल 18 सांसदों को मैदान में उतारा है। मध्य प्रदेश में तीन केंद्रीय मंत्रियों समेत 7 सांसदों को टिकट दिया गया है। वहीं, राजस्थान में बीजेपी ने 7 सांसदों को विधानसभा चुनाव का टिकट दिया है, जबकि छत्तीसगढ़ में 4 सांसदों को विधायकी का उम्मीदवार बनाया गया है।
पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में भाजपा ने ये रणनीति अपनाई थी। हालांकि, इसका नतीजा कुछ खास नहीं रहा था, फिर भी भाजपा ने इस रणनीति के तहत विधानसभा चुनाव में उतरने का फैसला किया है। त्रिपुरा में केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक ने 68 हजार मतों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी, तो वहीं पश्चिम बंगाल में पांच में से तीन सांसद विधानसभा का चुनाव हार गए थे।
भाजपा बोली- भले हार मिली, लेकिन इस दांव का फायदा भी मिला
बीजेपी ने यूपी के पिछले विधानसभा चुनाव में भी समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के खिलाफ केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्हें भी हार का मुंह देखना पड़ा था। हालांकि बीजेपी का मानना है कि केंद्र की राजनीति से राज्यों में भेजे गए नेता सिर्फ खुद की जीत ही सुनिश्चित नहीं करते बल्कि आसपास के इलाकों में भी पार्टी उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाते हैं।
बीजेपी का मानना है कि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी को इस दांव का फायदा मिला था।
उत्तर प्रदेश की करहल सीट पर केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव से हार गए, लेकिन उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री को अच्छी टक्कर दी। नतीजा ये भी हुआ कि मुलायम सिंह यादव के जमाने से ही समाजवादी पार्टी का गढ़ रही मैनपुरी सीट के साथ-साथ भोगांव सीट पर भी बीजेपी का कब्जा हो गया।
पश्चिम बंगाल में भले ही केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, लोकसभा सांसद लॉकेट चटर्जी और राज्यसभा सांसद स्वप्न दासगुप्ता विधानसभा चुनावों में खुद नहीं जीत सके, लेकिन उन सभी के प्रभाव से आसपास के क्षेत्रों में कई बीजेपी उम्मीदवार की किस्मत चमक गई। प. बंगाल में बीजेपी 3 विधायकों से 77 विधायकों वाली पार्टी बन गई।
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