बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि साल 2002 में गोधरा कांड के बाद, वे गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचक थे, लेकिन लोगों से बातचीत के बाद उनको लेकर राय बदल गई. उन्होंने यह बात दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में एक पुस्तक के विमोचन के दौरान कही.
उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने गोधरा के बाद गुजरात में चार महीने नहीं बिताए होते, तो मोदी के प्रति उनका नजरिया नहीं बदला होता.
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राज्यपाल ने कहा, 'साल 2002 में, गोधरा त्रासदी की वजह से हुई अशांति के बाद, मैं मोदी का आलोचक था. और मैंने पहले भी कहा है कि अगर उसके बाद मैंने गुजरात में चार महीने नहीं बिताए होते, वहां अलग-अलग समुदाय के लोगों से बातचीत नहीं की होती, तो मेरे नजरिया शायद वही रहता.'
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उन्होंने कहा कि उन्हें अहसास हुआ कि मोदी को 'बहुत गलत तरीके से बदनाम किया जा रहा था.' उन्होंने कहा, 'गुजरात दौरे के बाद मैंने अपने विचार दूसरों के साथ साझा करना शुरू कर दिया. वे निस्संदेह दृढ़ संकल्प के व्यक्ति हैं, और वे ऐसे व्यक्ति हैं जो कभी यह नहीं दिखाते कि वे जल्दबाजी में हैं. ऐसा लगता है कि वे कभी आराम नहीं करते. और वे हमेशा उस मार्ग पर चलने में व्यस्त रहते हैं जो उन्होंने अपने सामने निर्धारित किया है.'
राज्यपाल खान ने मुस्लिम महिला अधिनियम, 2019 के लिए भी प्रधानमंत्री को श्रेय दिया. उन्होंने कहा, 'मुझे उम्मीद है, और मुझे भरोसा है कि 50 साल बाद, न केवल इस देश के लोग, बल्कि हर जगह के लोग पहचानेंगे कि नरेंद्र मोदी ने कितना अद्भुत और महान काम किया है. क्योंकि दुनिया में हर जगह तीन तलाक को वैध नहीं माना जाता है. भारत में, यह पहली बार 2019 में इस अवैध करार दिया गया.'