नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने एक प्रस्ताव और एक विधेयक के साथ तीन साल पहले जम्मू-कश्मीर की स्थिति में ऐतिहासिक बदलाव की पटकथा लिखी थी। 5 अगस्त, 2019 को, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति को समाप्त करने और दो केंद्र शासित प्रदेशों में इसके विभाजन के लिए संसद में एक प्रस्ताव पेश किया था।
जम्मू और कश्मीर को संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A (राष्ट्रपति के आदेश के माध्यम से बनाया गया) के तहत एक विशेष दर्जा दिया गया था। जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति को समाप्त करने के लिए अनुच्छेद 370 को निरस्त करना भाजपा और उसके अग्रदूत जनसंघ की लंबे समय से मांग थी। इसी संबंध में जारी आंदोलन का नेतृत्व करते हुए जनसंघ के नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जम्मू और कश्मीर में हिरासत में मृत्यु हो गई थी।
लोकसभा चुनाव-2019 में भाजपा की लगातार दूसरी जीत के बमुश्किल दो महीने बाद, नरेंद्र मोदी सरकार ने इन अनुच्छेदों का हटाकर, जिसने जम्मू और कश्मीर को एक विशेष दर्जा दिया था और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र को राजनीतिक मजबूरियों से बचाने के लिए केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को उकेरा था।
धारा 370 के हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में कई बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिले।
गुप्कर गठबंधन – कश्मीरी महागठबंधन
2014 के बाद से चुनावों में भाजपा के अभूतपूर्व उदय के बाद वे विपक्षी दल भी साथ आ गए, जो पहले प्रतिद्वंद्वी थे। इसकी शुरुआत बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जनता दल-यूनाइटेड (जेडीयू) के एक साथ आने से हुई। प्रयोग को महागठबंधन कहा गया। इसकी सफलता को उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों सहित अन्य राज्यों में दोहराया गया।
इसी क्रम में जम्मू और कश्मीर में प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों, अब्दुल्लाहों की नेशनल कॉन्फ्रेंस और मुफ्तियों की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) भी एक साथ आ गए।
नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने 2020 में हाथ मिलाया था। इन नेताओं को 2019 में नज़रबंद कर दिया गया था।
दोनों ही दलों ने जम्मू-कश्मीर को पहले उपलब्ध विशेष दर्जे की बहाली के लिए लड़ने के लिए संकल्पों को अपनाया। कहा जाता है कि गुप्कर गठबंधन जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहा है, जिसके इस साल के अंत तक या अगले साल होने की संभावना है।
370 क्या है?
संविधान का अनुच्छेद 370 जम्मू और कश्मीर राज्य को विशिष्ट दर्जा प्रदान करता था, जिसमें नागरिकता के विभिन्न कानूनों के साथ-साथ निवासियों के लिए संपत्ति के अधिकार भी शामिल थे। इसने राज्य को अपना संविधान बनाने की भी अनुमति दी।
यह प्रावधान निर्दिष्ट करता था कि भारतीय संसद को रक्षा, विदेशी मामलों, संचार और सहायक मामलों को छोड़कर किसी भी कानून को लागू करने के लिए राज्य विधायिका की सहमति की आवश्यकता होगी।
संबंधित खबरें
'मॉक संसद' में ज्ञानेश कुमार भड़के राहुल गांधी, 2024 के लोकसभा चुनाव को बताया अवैध
9 mins agoगुजरात में 'राष्ट्रीय एकता दिवस' पर पीएम मोदी ने दिलाई एकता की शपथ
1 hr agoनागपट्टिनम में मिलीं नटराज और शिवकामी की प्राचीन कांस्य मूर्तियां
1 hr agoमॉक संसद में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग पेश, खरगे ने लगाए 6 गंभीर आरोप
2 hrs agoआशुतोष दीक्षित ने संभाली एयर चीफ मार्शल की कमान, अमर प्रीत सिंह हुए रिटायर
2 hrs agoउमर अब्दुल्ला ने निधि राजदान के साथ रचाई शादी, इसी साल हुआ था CM का तलाक
2 hrs agoदिवाली गिफ्ट को लेकर क्या हैं इनकम टैक्स के नियम, कितना महंगा दे सकते?
3 hrs agoआंध्र में आरी के साथ क्लासरूम में घुसा सिरफिरा, 2 छात्राओं पर किया हमला
3 hrs agoबेंगलुरु में 5 स्टार होटल के स्विमिंग पूल में करंट से 2 विदेशियों की मौत
5 hrs agoअमित शाह पहली बार होंगे अयोध्या के दीपोत्सव में शामिल, 7 नवंबर को समारोह
7 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines