लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का कहना है कि उन्होंने ही पीएम को सदन में आने से मना किया था. उन्होंने बड़ा दावा करते हुए कहा कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि कांग्रेस के सांसद उन पर शारीरिक हमला कर सकते थे. इस बीच हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया है. स्पीकर बिरला ने आगे कहा कि यदि पीएम नरेंद्र मोदी लोकसभा में आते तो उनके साथ कुछ गलत हो सकता था.
वहीं, स्पीकर ने तीन बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर चेयर से कहा कि कल लोकसभा के चैंबर में इस सदन के कुछ सदस्यों ने जिस तरह का व्यवहार किया, जिस तरह के दृश्यों का सृजन किया, वैसा इस सदन के इतिहास में आज तक कभी नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि हमारी संसदीय प्रणाली में सदन के सभापति का गरिमामयी स्थान हमारे संविधान ने ही सुनिश्चित किया है. स्पीकर ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों को सदन के कार्यालय तक कभी नहीं लाया गया, यही इतिहास रहा है.
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इस दौरान स्पीकर ओम बिरला ने कहा, 'प्रतिपक्ष के सदस्यों ने जो व्यवहार अध्यक्ष के कार्यालय में किया, वह हमारी संसदीय परंपराओं के लिए उचित नहीं था. स्पीकर ने कहा कि वह एक काले धब्बे की तरह था. हम सभी को सदन सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करना चाहिए. उन्होंने कहा कि इसके बाद जब सदन के नेता को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देना था, मेरे पास ऐसी पुख्ता जानकारी आई कि कांग्रेस पार्टी के कुछ सदस्य प्रधानमंत्री के आसन पर पहुंचकर कोई भी अप्रत्याशित घटना कर सकते हैं.'
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रद्द हुआ था पीएम मोदी का भाषण
बता दें कि लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जवाब बुधवार (4 फरवरी) को रद्द कर दिया गया था, क्योंकि पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अभी तक अप्रकाशित किताब को लेकर संसद में टकराव बढ़ गया था.
शाम 5 बजे जब लोकसभा दोबारा शुरू हुई, तो विपक्षी सदस्य पोस्टर और तख्तियां लेकर खड़े दिखे. हालांकि, कुछ ही मिनटों में सदन की अध्यक्षता कर रहीं बीजेपी सांसद संध्या राय ने दिन भर के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी थी.
बुधवार को संसद में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच एक किताब को लेकर टकराव देखने को मिला था. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी नरवणे की किताब की एक कॉपी संसद परिसर में लाए और वहीं, दूसरी ओर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे गांधी परिवार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कई किताबें लाए थे.