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अब AI पर कसेगी नकेल, तीन घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक कंटेंट; जानें नए आईटी नियमों में हुए क्या बदलाव?

केंद्र सरकार ने एआई से तैयार किए गए डिजिटल केंटेंट को लेकर सख्त दिशा-निर्देश लागू किए हैं. बता दें कि ये नए नियम आज यानी 20 फरवरी से लागू हो गए हैं. बता दें कि इन नियम से जुड़ा नोटिफिकेशन 10 फरवरी को जारी किया गया था.

केंद्र सरकार ने एआई से तैयार किए गए डिजिटल केंटेंट को लेकर सख्त दिशा-निर्देश लागू किए हैं. बता दें कि ये नए नियम आज यानी 20 फरवरी से लागू हो गए हैं. बता दें कि इन नियम से जुड़ा नोटिफिकेशन 10 फरवरी को जारी किया गया था.

नए नियमों के अनुसार, अब यदि कोई फोटो, वीडियो या फिर कोई ऑडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बनाया जाता है तो उस पर साफ तौर पर लेबल लगाना जरूरी होगा. इसके साथ ही किसी भी आपत्तिजनक या गैर-कानूनी कंटेंट की शिकायत मिलने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को सिर्फ 3 घंटे के भीतर उसे हटाना होगा. पहले यह समयसीमा 36 घंटे थी. सरकार ने कई पुराने नियमों को न सिर्फ बदला है, बल्कि नए नियमों को भी जोड़ा है. इसके तहत अब पहली बार भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आर्टिफिशियल इंटेलिसजेंस (AI) से बनाए गए कंटेंट और सिंथेटिक (संपादित किए गए ओरिजनल कंटेंट) सामग्री को विनियमित करने के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं.

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सरकार ने अब आईटी नियमों में क्या बदलाव किए हैं और यह बदलाव कब से लागू होंगे? नियमों में एआई से तैयार सामग्री और सिंथेटिक सामग्री को क्या पहचान-परिभाषा दी गई है? किस तरह से अब कानूनी तरीकों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डाली जाने वाली चीजों पर पुलिस कार्रवाई करेगी... ऐसे कई सवाल लोगों के मन में हैं तो आइए जानते हैं कि आखिर आईटी नियमों में क्या बदलाव हुए हैं?

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आईटी नियमों में क्या हुए बदलाव?

  • इन संसोधनों को केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय की तरफ से सूचना-प्रौद्योगिकी कानून, 2000 की धारा 87 के जरिए मिली ताकतों का इस्तेमाल करते हुए पेश किया गया है.
  • अब यूजर को सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए किसी भी कंटेंट पर ये बताना जरूरी होगा कि वो कंटेंट एआई से बना है या नहीं.
  • मेटाडाटा से छेड़छाड़ अब प्रतिबंधित है.
  • नियम तोड़ने पर अकाउंट सस्पेंड होगा और आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है.
  • कंटेंट असली है या नकली इसकी पहली जिम्मेदारी यूजर की होगी.

तीन घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक कंटेंट

  • केंद्र सरकार के नए आईटी नियमों के अनुसार, अब प्लेटफॉर्म को तीन घंटे में अवैध सामग्री हटानी होगी.
  • न्यूडिटि या डीपफेक अश्लील वीडियो के मामले में समयसीमा केवल 2 घंटे है.
  • नियम न मानने पर सोशल मीडिया कंपनियों की कानूनी सुरक्षा (धारा 79) खत्म हो जाएगी.
  • वहीं, बाल यौन शोषण और डीपफेक रोकने के लिए कंपनियों को एआई फिल्टर लगाने होंगे.

यूजर्स के लिए कैसे तय की गई नई जिम्मेदारियां?

  • नए संशोधित आईटी नियमों में डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां तय की गई हैं.
  • अनिवार्य घोषणा (यूजर डिक्लेरेशन): सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए अब यह जरूरी है कि वे यूजर्स से यह घोषणा लें कि उनके द्वारा अपलोड की गई सामग्री एआई की मदद से बनी है या नहीं. जब यूजर किसी बड़े प्लेटफॉर्म पर कंटेंट अपलोड करेंगे, तो इसकी घोषणा खुद ही करनी होगी कि क्या इसे एआई से बनाया गया है.
  • यूजर की खुद की जिम्मेदारी होगी कि जब वह सोशल मीडिया पर कुछ अपलोड करे तो यह बताए कि वो एआई से बना है या नहीं. मतलब अब हर कंटेंट की प्रथामिक जिम्मेदारी यूजर की होगी.
  • वहीं, अब यूजर्स को उन लेबल या स्थायी मेटाडाटा को हटाने या उसके साथ छेड़छाड़ करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है.


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