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जलाना था औरंगजेब का… जला दिया इस मुगल बादशाह का पोस्टर, जानें क्या है पूरा मामला?

औरंगजेब की कब्र को लेकर छिड़ा विवाद गहराता जा रहा है। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद ने आंदोलन और चक्का जाम करने के बाद कार सेवा करके मजार को तोड़ने की चेतावनी महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार को दी है। इसी बीच हिंदुत्ववादी संगठन ने पुणे में आंदोलन के वक्त औरंगजेब की जगह किसी और मुगल बादशाह का पोस्टर जला दिया।

पोस्टर जलाते हिंदू संगठन से जुड़े लोग।
महाराष्ट्र में औरंगजेब को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। औरंगजेब का मुद्दा इन दिनों महाराष्ट्र में सुर्खियों में है। समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र के मुखिया और विधायक अबू आजमी द्वारा मुगल बादशाह औरंगजेब का महिमामंडन से हिंदुत्ववादी संगठन गुस्से में है। इसी कड़ी में आज पुणे में पतित पावन संगठन ने औरंगजेब के खिलाफ आंदोलन करने की घोषणा की, संगठन के कार्यकर्ता आए भी लेकिन उन्होंने एक बड़ी गलती कर दी।

औरंगजेब की जगह जलाया बहादुर शाह जफर का पोस्टर

दरअसल, विरोध स्वरूप कार्यकर्ता औरंगजेब का पोस्टर जलाना चाहते थे लेकिन वो मुगल सल्तनत के आखरी बादशाह बहादुर शाह जफर पोस्टर लेकर आए और उसे आग के हवाले कर दिया। गौरतलब है कि सोमवार को मराठा साम्राज्य के सबसे बड़े योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती है। इसे शिव जयंती के रूप में मनाया जाता है और ठीक एक दिन पहले पुणे के पतित पावन संगठन के अध्यक्ष स्वप्निल नाईक द्वारा इस आंदोलन का आयोजन किया गया था। पोस्टर जलाने के बाद आयोजकों पता चला कि उन्होंने गलती से औरंगजेब की जगह बहादुर शाह जफर का पोस्टर जला दिया है। ये भी पढ़ें:- ‘औरंगजेब की कब्र हटाओ, वरना बाबरी मस्जिद जैसी कार सेवा करेंगे’; बजरंग दल-VHP का अल्टीमेटम

कौन हैं बहादुर शाह जफर?

मुगल सल्तनत की स्थापना बाबर ने 1526 में की थी. आगे जाकर इस मुगलिया सल्तनत ने भारत में 250 साल तक राज किया। बहादुर शाह जफर मुगल सल्तनत के आखरी शहंशाह थे। बहादुर शाह उर्दू के जाने माने शायर भी थे। उन्होंने प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय सिपाहियों का नेतृत्व किया था। युद्ध में हार के बाद ब्रिटिशों ने बहादुर शाह जफर को बर्मा जिसे अब म्यांमार कहा जाता है भेज दिया था, वहीं उनकी मौत हुई थी।

तारीफ करने पर सस्पेंड हो चुके हैं अबू आजमी

बता दें कि मुंबई की मानखुर्द शिवाजीनगर से समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने मुगल शासक औरंगजेब की तारीफ की थी। इस पर विवाद हुआ और उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी हुई। FIR तक दर्ज करा दी गई। विवाद बढ़ता देखकर विधानसभा स्पीकर ने उन्हें पूरे बजट सेशन के लिए सस्पेंड कर दिया। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री फडणवीस का बयान आया तो शिवसेना के दोनों खेमे आपस में टकरा गए। विधानसभा में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि सरकार को भी लगता है कि औरंगजेब की कब्र हटाई जानी चाहिए। कांग्रेस के राज में इस कब्र को पुरातत्व विभाग ASI का संरक्षण मिला। बता दें कि औरंगज़ेब की कब्र महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के खुल्दाबाद में है। यह इलाका औरंगाबाद शहर से 25 किलोमीटर दूर है, लेकिन अब औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग हिंदुत्ववादी संगठन कर रहे हैं।


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