हिमाचल प्रदेश के पालमपुर निवासी रक्षित चौहान 20 दिनों के लंबे इंतजार के बाद रविवार को सुरक्षित अपने घर लौट आए, जब सात जनवरी को वेनेजुएला के पास रूसी कंपनी के तेल टैंकर को अमेरिकी सेना ने कब्जे में ले लिया था. इस जहाज पर सवार तीन भारतीय नागरिकों में रक्षित भी शामिल थे और भारत सरकार के सतत प्रयासों से उन्हें रिहा करवाया गया.
बता दें कि जब रक्षित अपने घर पहुंचे तो उनके माता-पिता ने उनका मिठाई खिलाकर स्वागत किया और घर में खुशी की लहर दौड़ गई. रक्षित के बड़े भाई की शादी 19 फरवरी को होनी है, जिसकी तैयारियां चल रही हैं, लेकिन कब्जे की घटना के दौरान परिजनों पर चिंता का बोझ बढ़ता जा रहा था.
---विज्ञापन---
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के विदेश मंत्री से लगातार आग्रह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके फलस्वरूप रक्षित को जल्द रिहा किया गया. रक्षित के पिता ने केंद्र और प्रदेश सरकार का धन्यवाद देते हुए कहा कि बेटे की सुरक्षित वापसी से पूरा परिवार राहत की सांस ले रहा है.
---विज्ञापन---
रक्षित ने खुद बताया कि अमेरिकी कब्जे के 20 दिनों में वहां की सेना ने उनके साथ उचित व्यवहार किया. सात जनवरी को टैंकर कब्जे में लेने के बाद उन्हें गिरफ्तार तो नहीं किया गया, लेकिन फोन जब्त होने से घरवालों से संपर्क टूट गया था. भारत सरकार के हस्तक्षेप से अमेरिका ने उन्हें रिहा कर दिया और अब घर दीवली सा सजा हुआ है.
इस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के मुद्दे को उजागर किया है, जहां सरकार की त्वरित कूटनीति ने सकारात्मक परिणाम दिए.