डायबिटीज के कई मरीजों की सबसे बड़ी परेशानी यही होती है कि वे समय पर दवा लेते हैं, रोज टहलते भी हैं, मीठा भी छोड़ देते हैं, फिर भी सुबह की फास्टिंग शुगर 140-150 से नीचे नहीं आती. HbA1c महीनों तक ज्यादा बना रहता है, जिसे लेकर डर और तनाव दोनों बढ़ जाते हैं. दरअसल, समस्या सिर्फ दवा या वॉक की नहीं होती, बल्कि रोजमर्रा की डाइट और कुछ छोटा-मोटा अमलों के कारण ऐसा होता है. यह काम बाहर से नुकसानदेह नहीं दिखते लेकिन अंदर ही अंदर ब्लड शुगर को बिगाड़ते रहते हैं. यही वजह है कि तमाम कोशिशों के बावजूद शुगर कंट्रोल नहीं हो पाता.
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अनदेखा किया जाता है सबसे जरूरी फैक्टर
एक्सपर्ट अनुसार, डायबिटीज मरीजों को सिर्फ मीठा न खाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हर फूड का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) समझना जरूरी है. जिन चीजों का GI ज्यादा होता है, वे तेजी से ब्लड में शुगर बढ़ाती हैं. डायबिटीज में 54 या उससे कम GI वाले फूड्स ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं. लेकिन हमारी रोज की थाली में कई ऐसे फूड्स शामिल रहते हैं, जो देखने में आम लगते हैं, लेकिन शुगर के मीटर को बढ़ाए रखते हैं.
सबसे आम लेकिन सबसे खतरनाक दुश्मन
इसकी एक बड़ी वजह मैदा है, मैदा डायबिटीज के लिए सबसे बड़ा छुपा हुआ खतरा है. इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत ज्यादा होता है, क्योंकि इसमें से फाइबर और पोषक तत्व निकाल दिए जाते हैं. जब मैदा पेट में जाता है, तो बहुत जल्दी पचकर ग्लूकोज को सीधे खून में छोड़ देता है. इसका असर ऐसा होता है कि पैंक्रियाज अचानक बहुत ज्यादा इंसुलिन रिलीज करता है, जिसे इंसुलिन स्पाइक कहा जाता है. बार-बार होने वाला ये स्पाइक शरीर की कोशिकाओं को इंसुलिन रेजिस्टेंस बना देता है, नतीजा यह होता है कि शुगर खून में ही घूमती रहती है और सेल्स तक नहीं पहुंच पाती.
यही कारण है कि व्हाइट ब्रेड, बिस्किट या मैदा से बने स्नैक्स खाने के लिए अक्सर डॉक्टर मना करते हैं. इतना ही नहीं, साथ ही, मैदा आंतों की सेहत भी खराब करता है, जिससे शुगर कंट्रोल करना और मुश्किल हो जाता है.
रात में मीठा खाना
रात के खाने के बाद मीठा खाने की अक्सर लोगों को आदत होती है. उनकी इस आदत का हर्जाना बेहद नुकसानदेह होता है. रात के समय इंसुलिन का असर कम हो जाता है और अगर इस वक्त मीठा खाया जाए, तो शुगर पूरी रात बढ़ा रहता है. इसका असर सुबह की फास्टिंग शुगर और HbA1c दोनों पर पड़ता है.
इसलिए बेहतर रहेगा कि आप अपनी डाइट और खानपान को लेकर डॉक्टर से सलाह लें और हर सवालों का जवाब पूछे, ताकि शुगर लेवल कंट्रोल में न रहने के वक्त सही कदम उठाया जा सके.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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