द्वादश ज्योतिर्लिंग मंत्र में है समाधान
पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में द्वादश ज्योतिर्लिंग से संबधित एक प्रसिद्ध मंत्र दिया गया है। इस मंत्र में ज्योतिर्लिंग मंदिरों के क्रम और स्थित (Order and Location) बताई गई है। मान्यता है कि जिस क्रम में इस मंत्र में द्वादश ज्योतिर्लिंग का जिक्र हुआ है, उसका पालन करते हुए ज्योतिर्लिंग दर्शन से पूर्ण लाभ होता है और सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी हो जाती है। द्वादश ज्योतिर्लिंग मंत्र के अनुसार, यात्रा का क्रम इस प्रकार है।ये है द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन का सही क्रम
1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: इसे पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग माना गया है, जो गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है। मान्यता है कि इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं चंद्रदेव ने कुष्ठ रोग से मुक्ति पाने के लिए की थी। ज्योतिर्लिंग दर्शन तीर्थ यात्रा की शुरुआत इससे ही करनी चाहिए। 2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग: आन्ध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल नाम के पर्वत पर स्थित इस मंदिर को भगवान शिव के कैलाश पर्वत के समान माना गया है। कहते हैं, यहां शिव-पूजन करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होते हैं और इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने मात्र से ही सभी पापों से मुक्ति मिलती है। 3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग: मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन में स्थित यह ज्योतिर्लिंग एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जो अपनी सुबह की भस्म आरती के लिए प्रसिद्ध है। महाकालेश्वर की पूजा और दर्शन से आयु में वृद्धि होती है और अकाल मृत्यु से बचाव होता है। [caption id="attachment_789542" align="alignnone" ]
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं और केवल जानकारी के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।