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SIM Swap Scam से बचा सकती है eSIM! जानिए क्या है नया फ्रॉड और कैसे बच सकते हैं?

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SIM Swap Scam: लोगों के बीच eSIM की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है, लेकिन आईफोन 14 (iPhone 14) के लॉन्च के बाद से ही ये चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल, Apple ने फॉल इवेंट 2022 में अपनी आईफोन सीरीज को लॉन्च करने के दौरान घोषणा की थी कि यूएस में खुदरा बिक्री करने वाले सभी आईफोन 14 मॉडल में फिजिकल सिम स्लॉट नहीं होंगे। इससे ये साफ था कि आईफोन 14 सिर्फ eSIM को सपोर्ट करेगा।

बात करें eSIM की तो इसकी अवधारणा को व्यापक तौर पर स्वीकार नहीं किया गया है, ये फिजिकल सिम की तुलना में बहुत ज्यादा सुरक्षित और लाभदायक है। हालांकि, जब बात आती है लाभ की तो ये सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि सिम स्वैप धोखाधड़ी जैसे साइबर हमलों से सुरक्षित है।

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नए सिम कार्ड एक्टिवेशन से हासिल करते हैं डिटेल्स

पिछले कुछ सालाों में सिम स्वैप धोखाधड़ी के मामलों में काफी वृद्धि हुई है। हैकर्स कई लोगों को अपना निशाना बनाने के साथ एक ही नंबर के नए सिम कार्ड के एक्टिवेशन के दौरान यूज होने वाले टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और वेरिफिकेशन का बेनिफिट उठा रहे हैं।

eSIM है सुरक्षा के मामले में सुरक्षित

eSIM को एक्टिवेट करने के लिए आपको अपने डिटेल्स और व्यक्तिगत पहचान योग्य जानकारी (personally identifiable information) के साथ खुद को रजिस्ट्रार करना होगा। आप अपने eSIM अकाउंट को सुरक्षित करने के लिए सुरक्षा की कई परतों को सक्षम करने के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण जैसे फेस आईडी या फिंगरप्रिंट भी सेट कर सकते हैं।

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कैसे eSIM सिम स्वैप को रोक सकता है?

अपने eSIM को बदलने के लिए पहले देख लें कि क्या आपका स्मार्टफोन eSIM को सपोर्ट करता है और क्या आपका टेलीकॉम ऑपरेटर eSIM सुविधा प्रदान करता है। आपको बता दें कि Jio, Airtel और Vodafone-Idea जैसे दूरसंचार ऑपरेटर बिना किसी अतिरिक्त लागत के ई-सिम प्रदान करता है।

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क्या है SIM Swapping?

सिम स्वैपिंग एक ऐसा फ्रॉड है जिसमें हैकर्स किसी व्यक्ति की सिम को कंट्रोल करते हुए उनकी जानकारी हासिल करते हैं। ऐसे में किसी यूजर का ओटीपी से लेकर मैसेज या कॉल्स को भी हैकर्स कंट्रोल करने लगते हैं। सिम का कंट्रोल प्राप्त करने के लिए हैकर्स सोशल इंजीनियरिंग का तरीका अपनाते हैं। इसके बाद सिम यूजर की सारी जानकारी इकट्ठा कर लेते हैं।

इसके बाद हैकर्स टेलीकॉम ऑपरेटर से संपर्क कर सिम कार्ड खोने या खराब होने का कारण देकर वहीं नंबर हासिल कर लेते हैं। इस तरह से जरूरी जानकारियों के बदौलत हैकर्स नई सिम कार्ड प्राप्त कर लेते हैं और फिर यूजर्स के लिए समस्या खड़ी कर देते हैं।

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