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6G की रेस में चीन आगे, भारत कितना पीछे? जानिए 6G क्या है और इंडिया की कितनी है तैयारी

चीन ने 6G नेटवर्क की रेस में बड़ी बढ़त बना ली है और टेक्नोलॉजी ट्रायल का दूसरा चरण भी शुरू कर दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि भारत 6G की दौड़ में चीन से कितना पीछे है, भारत की तैयारी क्या है और आम लोगों को 6G से क्या फायदे मिलने वाले हैं. आसान भाषा में समझिए पूरी तस्वीर.

6G नेटवर्क की रेस में चीन से कितना पीछे है भारत. (Photo-News24 GFX)

6G In India: मोबाइल इंटरनेट की दुनिया लगातार बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है. अभी 5G ठीक से आम लोगों तक पहुंचा भी नहीं है कि 6G को लेकर हलचल तेज हो गई है. ऐसे में इस रेस में चीन सबसे आगे हैं. चीन ने 6G तकनीक के ट्रायल का पहला चरण पूरा कर लिया है और दूसरा चरण भी शुरू हो चुका है. इधर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 6G नेटवर्क लाने की दौड़ में भारत कहां खड़ा है, चीन से कितना पीछे है और 6G आने से आम लोगों की जिंदगी में क्या बदलेगा.

6G क्या है, आसान शब्दों में समझें

6G मोबाइल नेटवर्क की अगली पीढ़ी होगी, जो 5G से कहीं ज्यादा तेज, स्मार्ट और भरोसेमंद होगी. अगर 5G ने तेज इंटरनेट दिया, तो 6G का फोकस रीयल-टाइम कनेक्टिविटी पर होगा. इसमें इंटरनेट इतना तेज और बिना देरी के होगा कि डेटा भेजने और मिलने में लगभग समय ही नहीं लगेगा. 6G में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, IoT और सैटेलाइट नेटवर्क एक साथ काम करेंगे. कुल मिलाकर कहें तो चीते सा तेज.

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6G की रेस में चीन कहां तक पहुंचा?

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चीन के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक चीन ने 6G टेक्नोलॉजी ट्रायल का पहला चरण पूरा कर लिया है, जिसमें 300 से ज्यादा अहम तकनीकों को रिजर्व किया गया है. इसके बाद दूसरा चरण भी शुरू हो चुका है. चीन पहले ही 6G टेस्टिंग के लिए उपग्रह लॉन्च कर चुका है, ताकि टेराहर्ट्ज वेव पर कम्युनिकेशन को परखा जा सके. इनता ही नहीं पेटेंट के मामले में भी चीन सबसे आगे है और 6G से जुड़े करीब 40 प्रतिशत ग्लोबल पेटेंट उसके पास हैं. तकनीकी बुनियादी ढांचे और रिसर्च को देखते हुए चीन फिलहाल भारत से करीब 2 से 3 साल आगे माना जा रहा है.

भारत में 6G की तैयारी में कहां तक पहुंची?

वहीं बात करके भारत की तो वो भी इस रेस में पीछे नहीं रहना चाहता. सरकार ने ‘भारत 6G मिशन’ और ‘भारत 6G विजन’ लॉन्च किया है, जिसके तहत 2030 तक 6G सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. भारत 6G एलायंस (B6GA) के जरिए स्वदेशी तकनीक, रिसर्च और वैश्विक मानकों पर काम कर रहा है. भारत का फोकस हार्डवेयर से ज्यादा सॉफ्टवेयर, ओपन RAN और किफायती नेटवर्क समाधान पर है. पेटेंट की संख्या में भारत अभी चीन से पीछे है, लेकिन अंतर धीरे-धीरे कम हो रहा है.

6G आने के बाद क्या-क्या बदल जाएगा

6G आने के बाद इंटरनेट स्पीड कई गुना बढ़ जाएगी और भारी फाइलें सेकंड्स में डाउनलोड हो जाएंगी. देरी लगभग खत्म हो जाने से रीयल-टाइम कम्युनिकेशन हर तरीके से संभव होगा. स्मार्ट सिटी, स्मार्ट ट्रांसपोर्ट और ऑटोमेटेड सिस्टम पहले से कहीं ज्यादा बेहतर बनेंगे. मेडिकल फील्ड में डॉक्टर दूर बैठकर रोबोटिक सर्जरी कर सकेंगे. मेटावर्स, VR और AR का अनुभव ज्यादा असली और स्मूथ होगा. सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट से दूर-दराज के इलाकों में भी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी मिलेगी. यानी सीधे तौर पर कहा जा सकता है 6G के आने से ये स्पीड की गुना हो जाएगी.

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भारत के लिए 6G क्यों है अहम

भारत में 5G यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है और देश डिजिटल सेवाओं में बड़ा बाजार बन चुका है. 6G भारत को सिर्फ यूजर ही नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी लीडर भी बना सकता है. अगर भारत समय पर 6G लॉन्च करता है और स्वदेशी समाधान विकसित करता है, तो वह ग्लोबल डिजिटल इकोसिस्टम में मजबूत भूमिका निभा सकता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि 6G भारत के लिए स्टार्टअप्स, हेल्थकेयर, एजुकेशन और इंडस्ट्री 4.0 के नए रास्ते खोलेगा.

News24 GFX

5G और 6G में क्या अंतर होगा

5G में अधिकतम स्पीड लगभग 10 Gbps तक जाती है, जबकि 6G में यह 1 Tbps यानी 1000 Gbps तक पहुंच सकती है. 5G की लेटेंसी करीब 1 मिलीसेकंड है, वहीं 6G में यह घटकर 0.1 मिलीसेकंड रह जाएगी. 5G लाखों IoT डिवाइसेस को जोड़ सकता है, जबकि 6G में ट्रिलियन डिवाइसेस एक साथ कनेक्ट हो सकेंगी. तकनीक के स्तर पर 5G मिलीमीटर वेव पर बेस्ड है, जबकि 6G में टेराहर्ट्ज वेव और क्वांटम कम्युनिकेशन का इस्तेमाल होगा.

6G भारत में कब लॉन्च हो सकता है

फिलहाल भारत में 6G का कमर्शियल रोल-आउट 2029 से 2030 के बीच होने की उम्मीद है. सरकार और कंपनियां अभी रिसर्च, ट्रायल और पायलट प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं. चीन और अमेरिका भले ही इस रेस में आगे हों, लेकिन भारत भी तेजी से तैयारी कर रहा है.

आज की स्थिति में 6G नेटवर्क लाने की दौड़ में चीन भारत से कुछ कदम आगे जरूर है, लेकिन भारत की रफ्तार भी तेज है. आने वाले वर्षों में यह अंतर और कम हो सकता है. 

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