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Explainer: अगर ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध हुआ, तो किन 6 संकटों का सामना करेगी दुनिया?

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब वैश्विक चिंता का विषय बन गया है. अमेरिकी मोहलत के बाद बाजार और कूटनीति में हलचल है, संभावित युद्ध के छह बड़े असर सामने आ सकते हैं.

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी बन चुका है. अमेरिका द्वारा दी गई 10 दिनों की मोहलत ने वैश्विक बाजार और राजनीति में हलचल पैदा कर दी है. इस संभावित युद्ध के दुनिया पर पड़ने वाले 6 बड़े असर यहां दिए गए हैं.

कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल

अगर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होता है, तो इसका सबसे पहला और सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा. ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' को बंद कर सकता है, जहां से दुनिया का 25 प्रतिशत तेल और 20 प्रतिशत गैस गुजरता है. सप्लाई रुकने से कच्चे तेल के दाम आसमान छूने लगेंगे, जिससे पूरी दुनिया में ऊर्जा का संकट खड़ा हो जाएगा. भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, यह स्थिति आर्थिक रूप से बहुत महंगी साबित होगी. आम आदमी की जेब पर इसका सीधा बोझ पड़ेगा और महंगाई बेकाबू हो जाएगी.

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वैश्विक आर्थिक मंदी का खतरा

युद्ध की वजह से केवल तेल ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर सकती है. शेयर बाजारों में भारी गिरावट आएगी और निवेशकों का भरोसा टूट जाएगा. तेल की कीमतें बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग और ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ जाएगी, जिससे हर छोटी-बड़ी चीज महंगी हो जाएगी. दुनिया के कई बड़े बैंक और वित्तीय संस्थान पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि इस क्षेत्र में तनाव से वैश्विक मंदी की शुरुआत हो सकती है. मंदी का मतलब होगा नौकरियों में कटौती और आर्थिक विकास की रफ्तार का थम जाना, जिससे उबरने में सालों लग सकते हैं.

मध्य पूर्व में अस्थिरता और शरणार्थी संकट

ईरान और अमेरिका की लड़ाई केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरा मध्य पूर्व इसकी आग में जलने लगेगा. इराक, सीरिया और लेबनान जैसे पड़ोसी देश इस युद्ध का अखाड़ा बन सकते हैं. बड़े पैमाने पर बमबारी और तबाही के कारण लाखों लोग अपना घर छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे, जिससे एक नया शरणार्थी संकट पैदा होगा. ये लोग मदद के लिए यूरोप और अन्य पड़ोसी देशों की ओर रुख करेंगे, जिससे उन देशों की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ेगा. मानवीय दृष्टिकोण से यह स्थिति सदी की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक हो सकती है.

परमाणु हथियारों की होड़

इस युद्ध का एक खतरनाक पहलू परमाणु हथियारों की दौड़ भी है. अगर ईरान को लगता है कि उसकी सत्ता खतरे में है, तो वह अपने परमाणु कार्यक्रम को और तेज कर सकता है. इसे देखते हुए सऊदी अरब और तुर्की जैसे अन्य क्षेत्रीय देश भी अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश करेंगे. यह स्थिति पूरी दुनिया के लिए परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ा देगी. दशकों से चल रही शांति की कोशिशें बेकार हो जाएंगी और दुनिया एक ऐसे दौर में पहुंच जाएगी जहाँ परमाणु हथियारों का डर हर देश पर हावी होगा.

साइबर हमलों का बढ़ता खतरा

आधुनिक दौर का युद्ध केवल गोलियों और बमों से नहीं, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन से भी लड़ा जाता है. ईरान को साइबर युद्ध में काफी माहिर माना जाता है. युद्ध की स्थिति में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बैंकिंग सिस्टम, पावर ग्रिड और सरकारी वेबसाइटों पर बड़े साइबर हमले हो सकते हैं. इससे न केवल डेटा चोरी होने का डर है, बल्कि शहरों की बिजली और पानी जैसी जरूरी सेवाएं भी ठप की जा सकती हैं. साइबर हमले आम लोगों के जीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर सकते हैं और बिना एक भी गोली चले किसी देश की कमर तोड़ सकते हैं.

समुद्री व्यापार और ट्रांसपोर्ट पर असर

समुद्र के रास्ते होने वाला व्यापार दुनिया की लाइफलाइन है. खाड़ी क्षेत्र में युद्ध होने से मालवाहक जहाजों के लिए रास्ते बंद हो जाएंगे या उन्हें बहुत लंबे रूट से गुजरना होगा. इससे समुद्री बीमा की दरें बढ़ जाएंगी और सामान पहुंचने में हफ्तों की देरी होगी. दवाइयों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान तक की किल्लत पूरी दुनिया में देखने को मिल सकती है. हवाई यातायात भी इससे प्रभावित होगा क्योंकि युद्ध क्षेत्र के ऊपर से उड़ानें भरना खतरनाक हो जाएगा. कुल मिलाकर, यह युद्ध दुनिया के हर कोने में रहने वाले इंसान की जिंदगी को किसी न किसी तरह से प्रभावित करेगा.


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