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एक वक्‍त का खाना खाकर क‍िया गुजारा, ऑटो-रिक्शा ड्राइवर की बेटी ने पहली बार में ही कैसे पास किया NEET

Success Story : यह कहानी संघर्ष, अटूट संकल्प और पिता-पुत्री के अटूट विश्वास की है. ऑटो-रिक्शा ड्राइवर की बेटी ने पहले ही प्रयास में NEET (National Eligibility cum Entrance Test) जैसी कठिन परीक्षा पास करना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है.

प्रेरणा ने पहली बार में ही एक्‍गाम क्रैक क‍िया.

Success story: देश के सबसे मुश्‍क‍िल परीक्षाओं में से एक नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट अंडरग्रेजुएट (NEET UG) को पहली बार में क्लियर करना आसान नहीं है. खासकर तब जब कॉम्‍पेट‍िशन इतना हाई हो. हर साल, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) उम्मीदवारों को अच्छे नंबर लाने और उनके मेडिकल सफर का रास्ता बनाने का मौका देने के लिए भारत की सबसे बड़ी मेडिकल परीक्षा आयोजित करती है. इन उम्मीदवारों में प्रेरणा सिंह भी थीं, जो एक ऑटो-रिक्शा ड्राइवर की बेटी हैं, जिन्होंने मुश्किलों का सामना करते हुए अपने पहले ही प्रयास में NEET UG 2023 में अच्छी रैंक हासिल की.

ज‍िन्‍हें नहीं पता है, उन्‍हें बता दें क‍ि भारत के प्रतिष्ठित MBBS या BDS कॉलेजों में एडमिशन चाहने वाले स्टूडेंट्स के लिए एक मात्र रास्ता है.

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अभावों के बीच तैयारी

प्रेरणा ने कोटा में रहते हुए NEET UG की तैयारी शुरू की. साल 2018 में, जब वह 10वीं क्लास में थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया. इस खबर ने प्रेरणा और उनके परिवार को तोड़ दिया और परिवार की मानसिक और आर्थिक स्थिति खराब हो गई. लेक‍िन प्रेरणा ने हिम्मत दिखाई और अभावों के बीच भी अपनी तैयारी जारी रखने का फैसला क‍िया.

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एक वक्‍त का खाना
प्रेरणा के पास ल‍िम‍िटेड पैसे ही थे, इसल‍िए ऐसा अक्‍सर होता था क‍ि वह एक वक्‍त का खाना ही खा पाती थीं. सालों की मेहनत और लगन का नतीजा 2023 में मिला, जब प्रेरणा ने पहले ही अटेम्प्ट में NEET UG क्लियर कर लिया. पास होने वाले 2.5 लाख कैंडिडेट्स में से, उन्हें 720 में से 686 टोटल स्कोर के साथ ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1,033 मिली. एक मीडिया पोर्टल से बात करते हुए प्रेरणा ने कहा कि इस पूरे सफर में उनके पिता उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा थे, क्योंकि उनकी सीख ने उन्हें रास्ता ढूंढने में मदद की.

तैयारी की खास रणनीति
NCERT पर पकड़:

प्रेरणा ने बाजार की महंगी किताबों के बजाय NCERT की किताबों को अपना आधार बनाया और उन्हें कई बार पढ़ा.

YouTube और मुफ्त संसाधन:
डिजिटल इंडिया का लाभ उठाते हुए उसने इंटरनेट पर उपलब्ध मुफ्त लेक्चर और टेस्ट सीरीज का सहारा लिया.

अनुशासन:
रोजाना 12 से 14 घंटे की पढ़ाई और खुद के नोट्स बनाने की आदत ने उसे भीड़ से अलग कर दिया.


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