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दस मिनट की देरी और बुझ गई जिदगी: मैट्रिक परीक्षा केंद्र पर नहीं मिली एंट्री, छात्रा ने ट्रेन से कूदकर दी जान

बिहार के मसौढ़ी में परीक्षा केंद्र पर देरी से पहुंचने पर प्रवेश नहीं मिलने के बाद एक छात्रा की आत्महत्या ने सबको झकझोर दिया.घटना के बाद परीक्षा नियमों, ग्रेस एंट्री और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. अमिताभ ओझा की रिपोर्ट

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“सर प्लीज सर, गेट खोल दीजिए… करियर खराब हो जाएगा…”

यह गुहार उन छात्रों की थी जो मैट्रिक की परीक्षा देने समय पर केंद्र तो पहुंचे, लेकिन महज दो-चार मिनट की देरी के कारण उन्हें अंदर प्रवेश नहीं दिया गया. राज्य के कई जिलों से ऐसी तस्वीरें सामने आईं कहीं गेट बंद, कहीं रोते-बिलखते छात्र-छात्राएं. जगह बदलती रही, शहर बदलते रहे, लेकिन हालात वही रहे.

सबसे दर्दनाक घटना पटना के मसौढ़ी में

सबसे मार्मिक मामला पटना के मसौढ़ी से सामने आया. जानकारी के मुताबिक एक छात्रा परीक्षा केंद्र पर करीब दस मिनट की देरी से पहुंची थी. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उस दिन परीक्षा शुरू होने में लगभग 20 मिनट की देरी भी हुई थी, लेकिन बावजूद इसके गेट नहीं खोला गया. छात्रा ने काफी देर तक अनुरोध किया, लेकिन उसे प्रवेश नहीं मिला. मायूस होकर वह वहां से लौट गई.

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ट्रेन से कूदकर दी जान

घर लौटने के कुछ देर बाद छात्रा ने कथित तौर पर ट्रेन से कूदकर अपनी जान दे दी. घटना की सूचना मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. परिवार का कहना है कि अगर उसे परीक्षा देने का मौका मिल जाता तो शायद आज वह जिंदा होती. छात्रा के पिता मजदूरी करते है. दूसरे प्रदेश में गए हुए है. वो दो बहन और एक भाई में सबसे बड़ी थी. घटना की जानकारी मिलते है घर में कोहराम मच गया. परिजनों ने बताया की घर से सेंटर दस किलोमीटर की दुरी पर था.

सवालों के घेरे में सख्त नियम

परीक्षा में समय की पाबंदी जरूरी है, लेकिन क्या कुछ मिनट की देरी किसी छात्र का भविष्य तय कर दे? क्या ऐसी परिस्थितियों में मानवीय दृष्टिकोण नहीं अपनाया जाना चाहिए?

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क्या परीक्षा केंद्रों पर कुछ मिनट की “ग्रेस एंट्री” की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए?

इस बाबत बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का आधिकारिक बयान सामने आया है. परीक्षा समिति ने स्टूडेंट्स से अनुरोध किया है की “जिन किसी का पेपर छुट जाता है वो निराश नहीं हो अप्रैल के अंतम सप्ताह में विशेष परीक्षा का आयोजन किया जायेगा जिसका रिजल्ट भी तत्काल जारी कर दिया जायेगा.”

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शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नियम जरूरी हैं, लेकिन छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक स्थिति को भी समझना उतना ही आवश्यक है.

मानसिक स्वास्थ्य पर भी बड़ा सवाल

आज के प्रतिस्पर्धी माहौल में छात्र पहले ही भारी दबाव में रहते हैं. एक परीक्षा छूट जाना उन्हें जीवन समाप्त करने जैसा कदम उठाने की ओर धकेल सकता है यह बेहद चिंताजनक संकेत है.

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