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ग‍िराए जाएंगे 60 साल पुराने कृषि भवन और शास्त्री भवन, 3000 करोड़ की लागत से बनेगा नया भवन; टेंडर जारी

आजादी के शुरुआती दशकों में बने कृष‍ि भवन और शास्‍त्री भवन को ग‍िराए जाने की तैयारी है. इसकी जगह 3000 रुपये करोड़ की लागत से कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेर‍ियट बनाया जाएगा.

सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना (Central Vista Redevelopment Project) के तहत दिल्ली के ऐतिहासिक कृषि भवन और शास्त्री भवन को गिराने की तैयारी पूरी हो चुकी है. इनकी जगह लगभग 3000 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेर‍िएट (Common Central Secretariat) के नए ब्लॉक बनाए जाएंगे. ये दोनों ही इमारतें भारत की आजादी के बाद के शुरुआती दशकों की हैं और दिल्ली के लुटियंस जोन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं.

क‍ितने पुराने हैं ये भवन?

कृषि भवन (Krishi Bhawan) का निर्माण 1950 के दशक के मध्य में हुआ था. यह लगभग 65-70 साल पुराना है. इसका उद्घाटन भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के समय के आसपास हुआ था. यहां मुख्य रूप से कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय के कार्यालय रहे हैं.

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वहीं शास्त्री भवन (Shastri Bhawan) का निर्माण 1960 के दशक में हुआ था और इसका नाम भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर रखा गया है. यह लगभग 60 साल पुराना है. यहां शिक्षा, कानून, सूचना एवं प्रसारण जैसे कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों के दफ्तर संचालित होते रहे हैं.

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इन्हें गिराने की जरूरत क्यों पड़ी?
इन पुरानी इमारतों में कर्मचारियों की बढ़ती संख्या के लिए पर्याप्त जगह नहीं है. इसके अलावा ये इमारतें भूकंप रोधी (Earthquake resistant) नहीं हैं और आधुनिक फायर सेफ्टी मानकों को पूरा नहीं करतीं. इनमें तारों का जाल और पुरानी एयर-कंडीशनिंग प्रणाली ऊर्जा की भारी खपत करती है.

कई सरकारी दफ्तर किराये की इमारतों में चल रहे हैं. नए 'कॉमन सेंट्रल सचिवालय' में सभी मंत्रालयों को एक ही जगह लाने से सरकार के करोड़ों रुपये बचेंगे.

नया प्रोजेक्ट: 3,000 करोड़ का मास्टर प्लान
हाल ही में सीपीडब्ल्यूडी (CPWD) ने इन भवनों को गिराने और नए निर्माण के लिए निविदाएं (Tenders) जारी की हैं. नए भवन पूरी तरह डिजिटल और स्मार्ट होंगे. यहां मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय के लिए अंडरग्राउंड ट्रांजिट सिस्टम भी हो सकता है. कृषि भवन और शास्त्री भवन के अलावा आने वाले समय में निर्माण भवन और उद्योग भवन को भी चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा.

बता दें क‍ि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत ही नए संसद भवन का निर्माण हुआ है. अब पूरी 'राजपथ' (कर्तव्य पथ) के आसपास की रूपरेखा बदली जा रही है ताकि साल 2047 तक भारत के पास दुनिया का सबसे आधुनिक प्रशासनिक केंद्र हो.


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