नई दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 पेश करते हुए ऑटो कंपोनेंट्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के लिए आवंटन में करीब दोगुना बढ़ोतरी की है. हालांकि, वित्त मंत्री ने PLI योजना में किसी भी नए नीतिगत बदलाव की घोषणा नहीं की. आवंटन में बढ़ोतरी के बाद एडवांस्ड ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग में इंडस्ट्री को काफी मदद मिलने की उम्मीद है.
आर्थिक सर्वेक्षण 2026 के अनुसार, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार प्रदान कर रही है और भारत के कुल GST संग्रह में करीब 15 फीसदी का योगदान दे रही है.
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‘डेवलपमेंट ऑफ ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री’ की मानें तो बजट 2026-27 में ऑटो कंपोनेंट्स और ऑटोमोबाइल के लिए PLI योजना के तहत 5,939.87 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. यह राशि वित्त वर्ष 2025-26 के 2,818.85 करोड़ रुपये के बजट अनुमान की तुलना में बड़ा आंकड़ा है. हालांकि, 2025-26 के लिए 2,091.26 करोड़ रुपये का संशोधित अनुमान रखा गया है. वहीं, अगर हम 2024-25 की बात करें तो इसी योजना के तहत 325.35 करोड़ रुपये का वास्तविक खर्च हुआ था. कुल मिलाकर, इस बार के बजट में PLI को लेकर सरकार का फोकस काफी मजबूत नजर आ रहा है और बजट अनुमान में बड़ा इजाफा देखने को मिल रहा है.
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एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (AAT) वाहनों और कंपोनेंट्स को बढ़ावा देने के लिए सितंबर 2021 में 25,938 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय को मंजूरी दी गई थी. एक सर्वे के अनुसार, सितंबर 2025 तक इस योजना के तहत 35,657 करोड़ रुपये का संचयी निवेश आकर्षित हुआ है और 48,974 लोगों को रोजगार मिला है.
एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए PLI योजना में 2026–27 के लिए 86.01 करोड़ रुपये का बजट अनुमान रखा गया है, जबकि 2025–26 का संशोधित अनुमान 13.31 करोड़ रुपये और 2024–25 में वास्तविक खर्च 12.28 करोड़ रुपये रहा था. ACC PLI योजना का कुल अप्रूव्ड आउटले 18,100 करोड़ रुपये है और इसका लक्ष्य देश में 50 GWh घरेलू बैटरी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी स्थापित करना है. जबकि, अब तक 40 GWh क्षमता चुनिंदा कंपनियों को आवंटित की जा चुकी है.
आवंटन में बढ़ोतरी से यह संकेत मिलता है कि सरकार PLI की मदद से प्रोडक्शन और निवेश गतिविधियों में तेजी लाने की उम्मीद कर रही है, जिसके चलते परफॉर्मेंस से जुड़े लक्ष्यों के पूरा होने पर इंसेंटिव डिस्बर्समेंट में बढ़ोतरी होगी.
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