Tuesday, June 2, 2020

चीन को बर्बाद करने की तैयारी में अमेरिका, ताइवान को दिए ये एडवांस हथियार

चीन के लिए ताइवान के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करना आसान नहीं होगी, क्‍योंकि इस समय अमेरिका पूरी तरह से ताइवान के साथ खड़ा नजर आ रहा है। चीन की इसी हरकत को देखते हुए ट्रंप प्रशासन ने घोषणा की है कि उसने ताइवान को संभावित 180 मिलियन डॉलर की हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे दी है।

नई दिल्‍ली: कोरोना महामारी के लिए दुनिया चीन को दोषी मान रही है, लेकिन इस संकट के बीच भी ड्रैगन अपने पड़ोसियों के खिलाफ आक्रामण रुख अख्तियार किए हुए हैं। चीन की इसी हरकत को देखते हुए अमेरिका ने भी उसपर नजर बनाए हुए हैं। चीन इस समय ताइवान को लेकर सबसे ज्‍यादा बिफरा हुआ है, क्‍योंकि वहां की राष्‍ट्रपति ने साफ कर दिया है कि वह एक देश और दो प्रणाली पर काम नहीं करेंगी। जिसके बाद चीन को ऐसे मिर्ची लगी कि उसने ताइवान को बल प्रयोग की धमकी तक दे डाली।

हालांकि चीन के लिए ताइवान के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करना आसान नहीं होगी, क्‍योंकि इस समय अमेरिका पूरी तरह से ताइवान के साथ खड़ा नजर आ रहा है। चीन की इसी हरकत को देखते हुए ट्रंप प्रशासन ने घोषणा की है कि उसने ताइवान को संभावित 180 मिलियन डॉलर की हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे दी है। अमेरिका के इस कदम ने बीजिंग को और भी ज्‍यादा टेंशन में ला लिया है।

अमेरिका ने ताइवान को दिए ये हथियार
रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने घोषणा की है कि राज्य विभाग ने 180 मिलियन डॉलर की अनुमानित लागत के लिए अठारह MK-48 Mod6 उन्नत प्रौद्योगिकी हैवी वेट टॉरपीडो और संबंधित उपकरण ताइवान को देगा। घोषणा में कहा गया है, “प्रस्तावित बिक्री से वर्तमान और भविष्य में रक्षात्मक प्रयासों में ताइवान की क्षमता में सुधार होगा। ताइवान ने क्षेत्रीय खतरों के लिए और होमलैंड रक्षा को मजबूत करने के लिए इसका उपयोग करेगा। ट्रंप प्रशासन इससे पहले ताइवान को कई प्रमुख हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे चुका है, जिनकी कुल लागत 10 बिलियन डॉलर है। इसमें दर्जनों F-16 फाइटर जेट, M1A2T एब्राम टैंक और पोर्टेबल स्टिंगर एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल शामिल हैं।

चीन की अमेरिका को धमकी
घोषणा के जवाब में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा, ”हम ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री का कड़ा विरोध करते है। हम अमेरिकी पक्ष से कड़ाई से पालन करने का आग्रह करते हैं। चीन ने अमेरिका को धमकी देते हुए कहा कि वह ताइवान को सैन्य हथियार देना बंद करें, क्‍योंकि इससे ताइवान-स्ट्रेट में शांति और स्थिरता को नुकसान हो सकता है। इसी के साथ अमेरिका को ताइवान के साथ सैन्य लिंक को बंद करना होगा। ”

पेंटागन ने पिछले साल एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि क्रॉस स्ट्रेट संघर्ष में बीजिंग हर तरह से ताइवान पर भारी पड़ेगा क्‍योंकि उसने अपनी सेना का आधुनिकीकरण किया है। वाशिंगटन ने 40 वर्षीय के लंबे समय से ताइवान संबंध अधिनियम के हिस्से के रूप में उसे हथियार प्रदान किए हैं। बीजिंग ने हमेशा इसका विरोध किया है और इसे चीन की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। देश की कम्युनिस्ट सरकार ताइवान को अपने क्षेत्र के हिस्से के रूप में देखती है, हालांकि 1949 में एक खूनी गृहयुद्ध की समाप्ति के बाद से दोनों को अलग-अलग हो गए थे।

ट्रंप प्रशासन ने कोरोना वायरस के लिए चीन को इसकी उत्पत्ति के बारे में समय पर और पर्याप्त जानकारी नहीं देकर महामारी के प्रसार में योगदान देने के लिए बार-बार जिम्मेदार ठहराया है। इस महामारी से अमेरिकी में अभी तक 96,000 से ज्‍यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि मार्च से अबतक 36 मिलियन से अधिक अमेरिकियों ने अपनी नौकरी खो दी है। हालांकि बीजिंग का कहना है कि अमेरिका ने कोविड-19 के बचाव के लिए पर्याप्‍त कदम नहीं उठाए और इसके लिए वह चीन पर दोष लगा रहा है।

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