कितनी खतरनाक है ओरेश्निक मिसाइल? जिससे यूक्रेन पर रूस कर सकता है हमला, जेलेंस्की ने जारी किया हाई अलर्ट
Russia-Ukranie Warरूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव के बीच यूक्रेन ने पूरे देश में हाई अलर्ट जारी कर दिया है. राष्ट्रपति जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूस अपनी बेहद खतरनाक 'ओरेश्निक' हाइपरसोनिक मिसाइल से बड़े हमले की तैयारी कर रहा है, जिससे यूरोप में भी चिंता बढ़ गई है.
Written By: Azhar Naim|Updated: May 24, 2026 08:59
Edited By : Azhar Naim|Updated: May 24, 2026 08:59
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रूस-यूक्रेन जंग में बड़ा अपडेट. (Image: AI)
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रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध अब एक बेहद खतरनाक और विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है, जिससे पूरी दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध का खौफ पैदा हो गया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बीते शनिवार को देश के नाम एक बेहद गंभीर और आपातकालीन चेतावनी जारी करते हुए पूरे देश को हाई अलर्ट पर रहने को कहा है. जेलेंस्की का दावा है कि रूसी सेना यूक्रेन के रिहायशी और रणनीतिक ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए अपनी सबसे खतरनाक और अचूक 'ओरेश्निक' (Oreshnik) हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल से हमला करने की तैयारी में है. उनके मुताबिक, यह बेहद संवेदनशील और सीक्रेट इनपुट अमेरिकी और यूरोपीय खुफिया एजेंसियों के जरिए एक सीक्रेट मिशन के दौरान मिला है, जिसकी पुष्टि खुद यूक्रेन की मिलिट्री इंटेलिजेंस ने भी कर दी है.
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने देशवासियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया है कि इस बार व्लादिमीर पुतिन की सेना किसी एक ठिकाने को नहीं, बल्कि मल्टीपल मिसाइल अटैक के जरिए राजधानी कीव सहित देश के तमाम प्रमुख शहरों को एक साथ निशाना बनाने की फिराक में है. इस खौफनाक हवाई हमले में रूस अपने शस्त्रागार से अलग-अलग तरह के घातक और आत्मघाती हथियारों का इस्तेमाल करने जा रहा है. जेलेंस्की ने आम नागरिकों अपील की है कि वे शनिवार की शाम से बजने वाले हवाई हमले के सायरन (Air-Red Alert) को जरा भी हल्के में न लें. उन्होंने कहा कि रूसी पागलपन की कोई सीमा नहीं है, इसलिए सायरन बजते ही तुरंत सुरक्षित बंकरों में चले जाएं.
इसी साल जनवरी में भी रूस ने मचाई थी भयंकर तबाही
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कोई पहला मौका नहीं है जब रूस की इस 'ओरेश्निक' मिसाइल का नाम सुनकर पूरी दुनिया कांप उठी है. इससे पहले इसी साल जनवरी 2026 में भी रूस ने यूक्रेन के पश्चिमी हिस्से और सैन्य ठिकानों पर इस सुपर-फास्ट मिसाइल का इस्तेमाल करके भारी तबाही मचाई थी. उस समय ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपीय महाशक्ति देशों ने रूस के इस आक्रामक कदम की कड़े शब्दों में निंदा की थी और इसे वैश्विक शांति को खतरे में डालने वाला बताया था. अब एक बार फिर इस हाइपरसोनिक मिसाइल के इस्तेमाल की भनक लगते ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता तेज हो गई है. जेलेंस्की ने अमेरिका और यूरोप के अपने साथी देशों से अपील की है कि वे रूस पर पहले से ही दबाव बनाएं, ताकि वह इस युद्ध को और न बढ़ाए.
'ओरेश्निक' मिसाइल की खासियत
यह हाइपरसोनिक मिसाइल बेहद तेज गति से उड़ती है, जिससे मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम को इसे रोकने में भारी मुश्किल हो सकती है.
इसकी अनुमानित रेंज 1,000 से 5,500 किलोमीटर तक बताई जाती है, जिसका सीधा मतलब यह है कि रूस में बैठे-बैठे ही पुतिन इसके जरिए पूरे यूरोप महाद्वीप के किसी भी कोने को निशाना बना सकते हैं.
मिसाइल में MIRV तकनीक मौजूद होने की बात कही जाती है, जिसके जरिए एक ही मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला कर सकती है.
विशेषज्ञों के मुताबिक यह परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम हो सकती है, इसलिए इसे लेकर वैश्विक चिंता लगातार बढ़ रही है.
इसकी गति और भारी काइनेटिक एनर्जी के कारण बिना विस्फोटक वॉरहेड के भी यह जमीन पर भारी तबाही मचा सकती है.
रूस का दावा है कि यह मिसाइल उड़ान के दौरान दिशा बदल सकती है, जिससे इसे ट्रैक करना और इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल हो जाता है.
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध अब एक बेहद खतरनाक और विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है, जिससे पूरी दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध का खौफ पैदा हो गया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बीते शनिवार को देश के नाम एक बेहद गंभीर और आपातकालीन चेतावनी जारी करते हुए पूरे देश को हाई अलर्ट पर रहने को कहा है. जेलेंस्की का दावा है कि रूसी सेना यूक्रेन के रिहायशी और रणनीतिक ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए अपनी सबसे खतरनाक और अचूक ‘ओरेश्निक’ (Oreshnik) हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल से हमला करने की तैयारी में है. उनके मुताबिक, यह बेहद संवेदनशील और सीक्रेट इनपुट अमेरिकी और यूरोपीय खुफिया एजेंसियों के जरिए एक सीक्रेट मिशन के दौरान मिला है, जिसकी पुष्टि खुद यूक्रेन की मिलिट्री इंटेलिजेंस ने भी कर दी है.
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने देशवासियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया है कि इस बार व्लादिमीर पुतिन की सेना किसी एक ठिकाने को नहीं, बल्कि मल्टीपल मिसाइल अटैक के जरिए राजधानी कीव सहित देश के तमाम प्रमुख शहरों को एक साथ निशाना बनाने की फिराक में है. इस खौफनाक हवाई हमले में रूस अपने शस्त्रागार से अलग-अलग तरह के घातक और आत्मघाती हथियारों का इस्तेमाल करने जा रहा है. जेलेंस्की ने आम नागरिकों अपील की है कि वे शनिवार की शाम से बजने वाले हवाई हमले के सायरन (Air-Red Alert) को जरा भी हल्के में न लें. उन्होंने कहा कि रूसी पागलपन की कोई सीमा नहीं है, इसलिए सायरन बजते ही तुरंत सुरक्षित बंकरों में चले जाएं.
इसी साल जनवरी में भी रूस ने मचाई थी भयंकर तबाही
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कोई पहला मौका नहीं है जब रूस की इस ‘ओरेश्निक’ मिसाइल का नाम सुनकर पूरी दुनिया कांप उठी है. इससे पहले इसी साल जनवरी 2026 में भी रूस ने यूक्रेन के पश्चिमी हिस्से और सैन्य ठिकानों पर इस सुपर-फास्ट मिसाइल का इस्तेमाल करके भारी तबाही मचाई थी. उस समय ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपीय महाशक्ति देशों ने रूस के इस आक्रामक कदम की कड़े शब्दों में निंदा की थी और इसे वैश्विक शांति को खतरे में डालने वाला बताया था. अब एक बार फिर इस हाइपरसोनिक मिसाइल के इस्तेमाल की भनक लगते ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता तेज हो गई है. जेलेंस्की ने अमेरिका और यूरोप के अपने साथी देशों से अपील की है कि वे रूस पर पहले से ही दबाव बनाएं, ताकि वह इस युद्ध को और न बढ़ाए.
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‘ओरेश्निक’ मिसाइल की खासियत
यह हाइपरसोनिक मिसाइल बेहद तेज गति से उड़ती है, जिससे मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम को इसे रोकने में भारी मुश्किल हो सकती है.
इसकी अनुमानित रेंज 1,000 से 5,500 किलोमीटर तक बताई जाती है, जिसका सीधा मतलब यह है कि रूस में बैठे-बैठे ही पुतिन इसके जरिए पूरे यूरोप महाद्वीप के किसी भी कोने को निशाना बना सकते हैं.
मिसाइल में MIRV तकनीक मौजूद होने की बात कही जाती है, जिसके जरिए एक ही मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला कर सकती है.
विशेषज्ञों के मुताबिक यह परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम हो सकती है, इसलिए इसे लेकर वैश्विक चिंता लगातार बढ़ रही है.
इसकी गति और भारी काइनेटिक एनर्जी के कारण बिना विस्फोटक वॉरहेड के भी यह जमीन पर भारी तबाही मचा सकती है.
रूस का दावा है कि यह मिसाइल उड़ान के दौरान दिशा बदल सकती है, जिससे इसे ट्रैक करना और इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल हो जाता है.