Tuesday, July 7, 2020

नक्शा विवाद: अब चीन की चाल से ही नेपाल को घेरेगा भारत !

नेपाल की केपी शर्मा ओली की सरकार लगातार चीन की चालबाजी में फंसती जा रही है। चीन के इशारे पर नेपाल ने अपने नक्शे में भारत के तीन इलाकों लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को शामिल कर लिया है।

नई दिल्ली: नेपाल की केपी शर्मा ओली की सरकार लगातार चीन की चालबाजी में फंसती जा रही है। चीन के इशारे पर नेपाल ने अपने नक्शे में भारत के तीन इलाकों लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को शामिल कर लिया है। नेपाल सरकार ने इससे संबंधित संविधान संशोधन विधेयक रविवार को नेपाली संसद में पेश किया गया। नेपाली कांग्रेस ने यू-टर्न लेते हुए संसद में संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन करने का फैसला किया है। लिहाजा नेपाली संसद में पास होने की संभावना काफी बढ़ गई है।

नेपाल के इस कदम से भारत सख्त नाराज है। भारत ने नेपाल के इस कदम पर सख्त नाराजगी जताई है। जानकारों का कहना है कि नेपाल की मौजूदा सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की केपी शर्मा ओली की सरकार ने कुछ ठोस नहीं किया, लिहाजा देश की जनता ही नहीं पार्टी के भीतर भी प्रधानमंत्री ओली के खिलाफ असंतोष बढ़ता जा रहा है और गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में वो जरूरी मुद्दों से देश का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं और चीन की कठपुतली बनते जा रहे हैं।

विदेश मामलों के विश्लेषकों का कहना है कि नेपाल को कड़ा संदेश देने के लिए भारत अब इस मुद्दे पर नेपाल को चीन की ही चाल से घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। इन लोगों का कहना है कि नेपाल ने अपने नक्शे में बदलाव करके भारत और चीन के बीच हुए कुछ समझौतों को भी नजरअंदाज किया गया है।

दरअसल दिसंबर 1991 में चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री ली पेंग की भारत यात्रा में दोनों देशों ने सीमा पर व्यापार बहाल करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें आपसी सहमति से लिपुलेख को बॉर्डर ट्रेडिंग पॉइंट बनाया गया था। इससे अगले साल यानी जुलाई 1992 में भारत और चीन ने सीमा पर कारोबार के लिए प्रोटोकॉल फॉर एंट्री एंड एक्जिट प्रोसीजर पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें भी लिपुलेख को आपसी सहमति से बॉर्डर ट्रेडिंग पॉइंट बनाया गया था। लेकिन नेपाल ने तब से अबतक इन समझौतों पर कभी भी आपत्ति नहीं जताई।

इसके बाद 11 अप्रैल, 2005 में चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर आपसी विश्वास बढ़ाने के लिए एक समझौते पर दस्तख्त किए थे। इसके आर्टिकल 5 में कहा गया कि दोनों देश बॉर्डर मीटिंग पॉइंट्स के मैकेनिज्म को बढ़ाने के ईस्टर्न सेक्टर में किबिथू-दमाई और मिडल सेक्टर में लिपुलेख पास/कियांग ला को इसमें शामिल करने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हैं।

बताया जा रहा है कि इन समझौतों के आधार पर भारत नेपाल के साथ-साथ चीन पर भी दबाव बना सकता है। इतना ही नहीं कालापानी सीमा के मुद्दे पर भारत को आंखें दिखा कर नेपाल खुद ही मुसीबत में फंस गया है।

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  1. साला झूठ के अलावा और कुछ नहीं लिखते हैं इंडियन न्यूज़ रिपोर्टर। सारे दुनियामे सबसे झूठ बोलनेमे और चोरी करनेमे इंडिया नंबर वन पर हैं।

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