Monday, July 6, 2020

हो गया चमत्‍कार, कोरोना की वैक्सीन जून-जुलाई तक होगी तैयार

एक राहत की खबर यह आई है कि ब्रिटेन ने जल्‍द ही वैक्‍सीन बनाने का दावा किया है। जिसको लेकर अमेरिका ने उसके साथ एक करार किया है, जिसके बाद उसे एक चौथाई वैक्‍सीन अमेरिका को देनी होंगी। इसके लिए अमेरिका ब्रिटेन की कंपनी को 1.2 अरब डॉलर देने को भी तैयार है।

दिव्या अग्रवाल, नई दिल्‍ली: दुनिया को कोरोना से लड़ते हुए 5 महीने से ज्‍यादा का समय हो गया है, लेकिन इसकी अभी तक कोई दवा नहीं है। ऐसे में इस महामारी से संक्रमित मरीजों की तादाद में भी लगातार इजाफा हो रहा है। हालांकि इस बीच एक राहत की खबर यह आई है कि ब्रिटेन ने जल्‍द ही वैक्‍सीन बनाने का दावा किया है। जिसको लेकर अमेरिका ने उसके साथ एक करार किया है, जिसके बाद उसे एक चौथाई वैक्‍सीन अमेरिका को देनी होंगी। इसके लिए अमेरिका ब्रिटेन की कंपनी को 1.2 अरब डॉलर देने को भी तैयार है।

जी हां, ब्रिटिश मेडिसिन निर्माता कंपनी एस्ट्रा जेनेका को उम्मीद थी कि कोरोना महामारी का वैक्सीन जून-जुलाई तक तैयार हो जायेगा। एनिमल ट्रायल के बाद अब उस वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल चल रहा था। पहले चरण के ह्यूमन ट्रायल पूरा हो चुका था। यही ये भी कयास लगाए जा रहे थे कि अगर सब कुछ सही और पूर्व निर्धारित मानकों के अनुसार परिणाम मिले तो शीघ्र ही बड़े पैमाने पर वैक्सीन का उत्पादन भी शुरू हो जाएगा।

देशों की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए ये बेहद जरूरी कदम है। हालांकि अभी ये साफ नहीं हुआ है कि ये दवाई कोरोना वायरस में कितनी कारगर साबित होगी। हालांकि दुनिया के बड़े लीडर्स का कहना है कि गिरती अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एकमात्र तरीका वैक्सीन है। डोनाल्ड ट्रम्प इस दवाई की मांग पहले ही कर चुके है। अमेरिका के हेल्थ और ह्यूमन सेवा प्रदान करने वाला विभाग 1.2 अरब डॉलर देने को भी तैयार है। जिससे ब्रिटिश ड्रग मेकर की दवाई को विकसित किया जा सके।

इस सौदे के तहत अमेरिका क्लीनिकल ट्रायल के तीसरे चरण के लिए अपने यहां 30,000 लोगों पर इसके परीक्षण की अनुमति देगा। इस टीके का नाम एजेडडी 1222 है। इसके क्लीनिकल ट्रायल के पहले व दूसरे चरण की शुरुआत पिछले महीने हुई है। इसमें 18 से 55 साल की उम्र के 1,000 से ज्यादा स्वस्थ लोगों को शामिल किया गया है।

इससे पहले जैव प्रौद्योगिकी कंपनी ‘मॉडर्ना’ ने भी दावा किया था कि उसके द्वारा विकसित किए गए टीके के शुरुआती परीक्षण के परिणाम आशाजनक रहे हैं। कंपनी का कहना था कि आठ स्वस्थ स्वयंसेवियों को टीके की दो-दो खुराक दी गई, जिसके नतीजे अच्‍छे रहे थे। अब देखना यह है दुनिया में सबसे पहले कोरोना का टीका कहां बनता है।

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