Saturday, July 4, 2020

जानिए जी-7 की अहमियत, इसमें शामिल होने से भारत को क्‍या होगा फायदा?

फिलहाल जिस वजह से पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति का याराना सुर्खियां बटोर रहा है वो है जी-7 में भारत को सदस्य बनाने की पुरजोर पैरवी, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति के चाहने भर से आर्थिक रूप से ताकतवर जी-7 देशों के क्लब में भारत की एंट्री हो जाएगी और अगर हो भी गई तो फिर इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा?

नई दिल्‍ली: फिलहाल जिस वजह से पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति का याराना सुर्खियां बटोर रहा है वो है जी-7 में भारत को सदस्य बनाने की पुरजोर पैरवी, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति के चाहने भर से आर्थिक रूप से ताकतवर जी-7 देशों के क्लब में भारत की एंट्री हो जाएगी और अगर हो भी गई तो फिर इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा?

डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रुप-7 में भारत के साथ साथ रूस, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया को भी शामिल करने की इच्छा जाहिर की है। लिहाजा ये जान लेना जरूरी है कि जी-7 आखिर है, क्या और कौन-कौन से देश इस समूह के सदस्य हैं।

जी-7 की अहमियत

  • जी-7 दुनिया के सात विकसित देशों का एलीट क्लब है
  • ये समूह विश्व की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करता है
  • इन देशों का दुनिया की 40 प्रतिशत जीडीपी पर कब्जा है
  • कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, ब्रिटेन, इटली और अमेरिका इसके सदस्य हैं

जाहिर है अगर ट्रंप की कोशिश कामयाब हुई तो फिर जी-7 का नाम जी-11 हो जाएगा और भारत के साथ ही रूस, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया भी इसके सदस्य बन जाएंगे। दिलचस्प बात ये है कि जीडीपी के हिसाब से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद चीन जी-7 का हिस्सा नहीं है, क्योंकि चीन में सबसे ज्यादा आबादी है और उसकी प्रति व्यक्ति आमदनी जी-7 देशों के मुकाबले काफी कम है। ऐसे में अगर भारत को इस क्लब की सदस्यता मिलती है तो न सिर्फ भारत की धाक बढ़ेगी, बल्कि चीन की चौधराहट भी कम हो जाएगी। हालांकि डोनल्ड ट्रंप चुनाव का सामना करने वाले हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या ट्रंप सिर्फ भारतीय वोटरों को साधने की चाल रहे हैं या फिर अपने प्रतिद्वंदी चीन को घरेने के लिए भारत का सहारा ले रहे हैं।

70 के दशक में कई देश गंभीर आर्थिक संकट में घिर गए थे। पहला तेल संकट था तो दूसरा फिक्स्ड करेंसी एक्सचेंज रेट्स के सिस्टम का ब्रेक डाउन। 1975 में जी7 की पहली बैठक हुई थी, जिसमें इन इसके समाधान पर चर्चा हुई थी। लेकिन अब चार दशक से ज्यादा समय बीत चुका है और दुनिया की आर्थिक चुनौतियां भी बदल चुकी है। ऐसे में भारत और ट्रंप की केमिस्ट्री दुनिया को नया रास्ता दे सकती है। मोदी ट्रंप का याराना चीन और पाकिस्तान की नापाक चालों को भी नाकाम कर सकती है।

ह्यूस्टन में पिछले साल सितंबर में हुए ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम और इस साल फरवरी में अहमदाबाद में हुए ‘नमस्ते ट्रंप’ कार्यक्रम के बाद ट्रंप ने मोदी की तारीफ करने का कोई मौका नहीं गंवाया है, लेकिन दोनों नेताओं की दोस्ती की बुनियाद बहुत पुरानी है।

कब-कब मिले मोदी-ट्रंप?

  • 27 जून 2017 वाइट हाउस में दोनों नेताओं के बीच पहली मुलाकात हुई थी
  • जुलाई 2017 में जर्मनी में जी 20 देशों की बैठक में दोनों नेता मिले थे
  • 12 नवंबर 2017 को मनीला में आसियान सम्मेलन में भी दोनों नेता मिले थे
  • नवंबर 2018 में अर्जेंटीना में जी 20 बैठक में दोनों की मुलाकात हुई
  • जून 2019 में जापान के ओसाका में जी 20 में फिर से मुलाकात हुई
  • 26 अगस्त 2019 फ्रांस के बिआरिट्ज में जी-7 सम्मेलन में मीटिंग हुई
  • 22 सितंबर 2019 को ह्यूस्टन में ‘हाउडी मोदी’ में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई
  • 24-25 फरवरी 2020 को अहमदाबाद में ‘नमस्ते ट्रंप’ के दौरान दोनों नेता मिले

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