Saturday, July 4, 2020

चीन के बहकावे में आकर भारत से रिश्ते बिगाड़ने पर आमादा नेपाल, अब कर रहा है ये काम

चीन के बहकावे में आकर नेपाल की मौजूदा सरकार भारत से अपने रिश्‍ते न सिर्फ खराब कर रही है बल्कि खत्‍म करने की ओर बढ़ रही है। ये सबकुछ मौजूदा सरकार के कार्यकाल में तेजी से हुआ है। नेपाल में देश के नए नक्शे के लिए संविधान संशोधन का रास्ता साफ हो गया है।

नई दिल्ली: चीन की वजह से नेपाल और भारत के रिश्‍तों में लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। चीन के बहकावे में आकर नेपाल की मौजूदा सरकार भारत से अपने रिश्‍ते न सिर्फ खराब कर रही है बल्कि खत्‍म करने की ओर बढ़ रही है। ये सबकुछ मौजूदा सरकार के कार्यकाल में तेजी से हुआ है। नेपाल में देश के नए नक्शे के लिए संविधान संशोधन का रास्ता साफ हो गया है। नेपाल की संसद में नक्शे में बदलाव के लिए विधेयक पेश हो गया है।

नेपाल के मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने इसके लिए जरूरी संविधान संशोधन विधेयक को समर्थन देने का फैसला किया है। नेपाल के मीडिया समूह काठमांडू पोस्ट के अनुसार, नेपाली कांग्रेस की सीडब्ल्यूसी ने पार्टी के सांसदों को निर्देश दिया है कि वे राष्ट्रीय प्रतीक में देश का नक्शा बदलने के लिए संविधान में संशोधन के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करें। सीडब्ल्यूसी सदस्य मिन बिश्कर्मा ने कहा, ‘पार्टी अब वोट डालने के लिए बिल के पक्ष में खड़ी होगी।’ नेपाली कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, CWC की बैठक में रखा गया प्रस्ताव संविधान संशोधन विधेयक से संबंधित था, जो संविधान के अनुच्छेद 9 (2) से संबंधित अनुसूची 3 में शामिल राजनीतिक मानचित्र में संशोधन लाने के लिए है।

इस संवैधानिक संशोधन को पिछले हफ्ते पेश करने में देरी हुई थी क्योंकि पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक में नेपाली कांग्रेस ने इसपर चर्चा करने के लिए और समय मांगा था। शनिवार को नेपाली कांग्रेस ने इसे अपना आधिकारिक समर्थन दिया। नेपाल इस मुद्दे पर विदेश सचिव स्तर की वार्ता के लिए उत्सुक है। वहीं भारत सरकार का कहना है कि वह बातचीत के लिए तैयार है लेकिन भरोसे और विश्वास का वातावरण बनाने की आवश्यकता है।

इससे अब इस विधेयक के दो-तिहाई बहुमत से पारित होना तय है। जिससे भारत के साथ रिश्तों में खटास आ सकती है। नेपाल की ओली सरकार ने देश के नए नक्शे में भारत के तीन इलाकों कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख को भी शामिल किया है। नेपाल ने अपने नए नक्‍शे में कुल 395 वर्ग किलोमीटर के इलाके को शामिल किया है।

दरअसल जब रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 80 किलोमीटर के धारचूला-लिपुलेख मार्ग का लोकार्पण किया तब नेपाल ने इस पर आपत्ति जताते हुए लिपुलेख को अपना क्षेत्र बताया। धारचूला-लिपुलेख वाला मार्ग कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों के लिए अच्छा होगा और इससे उनका समय भी बचेगा। पहले तीर्थयात्रियों को ये यात्रा पूरी करने में दो से तीन हफ्ते लग जाते थे लेकिन अब मात्र एक हफ्ते में यात्रा पूरी की जा सकेगी। यह नया मार्ग पिथौरागढ़-तवाघाट-घटीअबागढ़ मार्ग का विस्तार है। नेपाल सरकार ने अपने नए राजनीतिक नक्शे में लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी और अपना क्षेत्र बताया है जिससे विवाद खड़ा हो गया।

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