Friday, July 10, 2020

दूसरी बार ताइवान की राष्‍ट्रपति बनीं त्‍साई की चीन को दो टूक, भड़का ड्रैगन

पद ग्रहण करने के साथ ही त्‍साई ने चीन को दो टूक कह दिया है कि वह बीजिंग से बात करने को तैयार है, लेकिन हांगकांग की तरह एक देश, दो सिस्‍टम नहीं मानेंगी। त्‍साई का यह बयान बीजिंग को रास नहीं आ रहा है, क्‍योंकि वह ताइवान को अपना ही अभिन्‍न अंग मानता है। ऐसे में वह किसी भी शर्त के साथ बातचीत करने को तैयार नहीं है।

नई दिल्‍ली: एक बार फिर से त्साई इंग-वेन ताइवान की राष्‍ट्रपति बन गई है। कोरोना काल में चीन के साथ गहराए विवाद के बीच त्साई को रिकॉर्ड रेंटिंग मिली। पद ग्रहण करने के साथ ही त्‍साई ने चीन को दो टूक कह दिया है कि वह बीजिंग से बात करने को तैयार है, लेकिन हांगकांग की तरह एक देश, दो सिस्‍टम नहीं मानेंगी। त्‍साई का यह बयान बीजिंग को रास नहीं आ रहा है, क्‍योंकि वह ताइवान को अपना ही अभिन्‍न अंग मानता है। ऐसे में वह किसी भी शर्त के साथ बातचीत करने को तैयार नहीं है।

त्‍साई ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ सह अस्तित्व के आधार पर बातचीत की पेशकश भी की है। उन्‍होंने कहा कि वह चीन के साथ बातचीत करने को तैयार हैं, लेकिन एक देश-दो सिस्टम के मुद्दे पर नहीं। त्साई ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान चीन से सभी प्रकार के संबंधों को खत्म कर दिया था। जिसके बाद चीन ने भड़कर ताइवान पर सैन्य कार्यवाई की धमकी भी दी थी। चीन किसी भी कीमत में ताइवान पर अपना कब्‍जा जमाने की बात कह चुका हैं। हालांकि यह उसके लिए इतना आसान नहीं होगा, क्‍योंकि ताइवान को चीन का समर्थन प्राप्‍त है।

हालांकि इस बार त्‍साई ने अपने रुख को थोड़ा नरम किया है, लेकिन उन्‍होंने साफ कर दिया है कि दोनों पक्षों का कर्तव्य है कि वे दीर्घकालिक रूप से सह-अस्तित्व का रास्ता खोजें और दुश्मनी या मतभेदों को बढ़ने से रोकें। त्साई ने चीन और ताइवान के बीच संबंधों में शांति, समानता, लोकतंत्र और बातचीत का आह्वाहन किया। उन्होंने हांगकांग की तरह एक देश, दो प्रणालियों के तहत चीन के साथ जाने का अपना विरोध भी दोहराया।

चीन और ताइवान में क्‍या है विवाद

1949 में चीन में भयंकर गृह युद्ध हुआ था, जिसमें माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्ट पार्टी ने वहां की सत्‍ता संभाल रहे चियांग काई शेक के नेतृत्व वाले कॉमिंगतांग सरकार का तख्तापलट कर दिया था। चियांग ने हारकर ताइवान द्वीप में जाकर अपनी सरकार का गठन किया। हालांकि माओत्‍से ने चीन पर कब्‍जा कर लिया था। उसने इसके बाद ताइवान पर भी कब्‍जा करने की कोशिश की, लेकिन माओत्‍से ने अमेरिका से मदद मांगी। जिसके बाद उस समय की कम्यूनिस्ट पार्टी को पीछे हटना पड़ा।

हालांकि अभी तक चीन ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है। चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी इसके लिए सेना के इस्तेमाल पर भी जोर देती आई है। ताइवान के पास अपनी खुद की सेना भी है। जिसे अमेरिका का समर्थन भी प्राप्त है। हालांकि ताइवान में जबसे डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी सत्ता में आई है तबसे चीन के साथ संबंध खराब हुए हैं।

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