Friday, July 10, 2020

चीन का साथ देना WHO को पड़ा महंगा, अब हो जाएगा कंगाल !

दुनिया भर में स्वास्थ सेवा और महामारी जैसी बीमारियों के काम करने वाली सबसे बड़ी संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) यानि वर्ल्ड़ हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन पर बड़ा आर्थिक संकट मंडरा रहा है क्योंकि अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ से सारे संबंधों को तोड़ने ऐलान करते हुए इस इस संस्था को अमेरिका से मिलने वाले सारे फंडिंग पर रोक लगा दी है।

नई दिल्ली: दुनिया भर में स्वास्थ सेवा और महामारी जैसी बीमारियों के काम करने वाली सबसे बड़ी संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) यानि वर्ल्ड़ हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन पर बड़ा आर्थिक संकट मंडरा रहा है क्योंकि अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ से सारे संबंधों को तोड़ने ऐलान करते हुए इस इस संस्था को अमेरिका से मिलने वाले सारे फंडिंग पर रोक लगा दी है। जिसकी घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत के दौरान की ।

डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि WHO को सबसे ज्यादा पैसा अमेरिका से मिलता है, लेकिन इस संस्था ने हमेशा से हमारी आलोचना की है और हमारी बात नहीं मानी। उन्होंने बहुत कुछ गलत किया है उनके पास शुरुआत से ही ढ़ेर सारी जानकारियां थी पर उन्होने सच को छिपाया और चीन का साथ दिया, वो सारी बातें जानते थे या नहीं जानते थे, हमें नहीं पता लेकिन अब हम इसे गंभीरता से ले रहे हैं और अब हम WHO को मिलने वाली सारी राशियों पर रोक लगा रहे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन से अमेरिका के अलग होने के ऐलान के बाद से ही संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था के कंगाल होने की कयासबाजियां शुरू हो गई हैं। बता दें कि इस संस्था को सालाना 4 करोड़ डॉलर का सबसे ज्यादा फंड अमेरिका से ही मिलता था, लेकिन फिर भी वो चीन के नियंत्रण में है इसलिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार डब्लूएचओ सार्वजनिक तौर पर खरी-खरी सुना चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टैड्रोस ऐडरेनॉम गैबरेयेसस ने 2017 में डब्लूएचओ की कमान संभाली थी। कहा जाता है कि उन्हें यह पद चीन के पैरवी करने के कारण मिला था। इसलिए वह चीन के हक में फैसले ले रहे हैं।

ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि अमेरिका की ओर से हाथ खींचने के बाद क्या वाकई में कंगाल हो जाएगा WHO? दरअसल WHO को दो तरीकों से फंड मिलता है,। पहला- असेस्ड कंट्रीब्यूशन। इस फंड को WHO के सदस्य देश देते हैं। कौन सा देश कितना फंड देगा ये पहले से निश्चित होता है। फंड का निर्धारण उस देश की अर्थव्यवस्था और जनसंख्या के आंकड़ों के जरिए किया जाता है। असेस्ड कंट्रीब्यूशन के जरिए ही विश्व स्वास्थ्य संगठन को सबसे ज्यादा फंडिंग मिलती है। इससे WHO अपने खर्च और प्रोग्राम की फंडिंग करता है। और दूसरा- वॉलेंटरी कंट्रीब्यूशन। इन दोनों तरीकों से मिले फंड से ही विश्व स्वास्थ्य संगठन का खर्च चलता है।

असेस्ड कंट्रीब्यूशन
इस फंड को विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देश देते हैं। यह पहले से ही निश्चित होता है कि कौन सा देश कितना फंड देगा। इस फंड का निर्धारण उस देश की अर्थव्यवस्था और जनसंख्या के आंकड़ों के जरिए किया जाता है। असेस्ड कंट्रीब्यूशन के जरिए ही विश्व स्वास्थ्य संगठन को सबसे ज्यादा फंडिंग मिलती है। इससे WHO अपने खर्च और प्रोग्राम की फंडिंग करता है।

वॉलेंटरी कंट्रीब्यूशन
यह फंड एक निश्चित प्रोग्राम को लेकर दिए जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन इस फंड का इस्तेमाल केवल उन्हीं काम में करता है जिसके नाम पर यह फंड मिला होता है। जैसे कोरोना वायरस की दवा बनाने के लिए WHO को अगर किसी संस्था या देश से फंड मिला है तो वह केवल इस वैक्सीन को बनाने में ही इस फंड को खर्च कर सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिकी फंडिंग

विश्व स्वास्थ्य संगठन को दुनिया में सबसे ज्यादा फंडिंग अमेरिका से मिलती है। अमेरिका इस संगठन को असेस्ड और वॉलेंटरी दोनों प्रकार के फंड उपलब्ध करवाता है। रिपोर्ट के अनुसार, WHO के असेस्ड फंड का 22 फीसदी हिस्सा अकेले अमेरिका देता है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अमेरिका के विश्व स्वास्थ्य संगठन से अपने संबंध तोड़ने पर यह संस्था आर्थिक रूप से मुश्किल में फंस सकती है।

WHO को कई बार ट्रंप घेर चुके हैं। कोरोना महामारी को लेकर ट्रंप ने इससे पहले भी डब्ल्यूएचओ को कई बार घेरा था। ट्रंप ने हाल ही में कोरोना वायरस संकट पर गैर जिम्मेदार तरीके से काम करने का आरोप लगाते हुए WHO को दी जाने वाली आर्थिक सहायता पर रोक लगा दी थी। ट्रंप ने कहा था कि जब तक कोरोना के प्रसार को कम करने को लेकर WHO की भूमिका की समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक यह रोक जारी रहेगी। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका के करदाता डब्ल्यूएचओ को सालाना 40 से 50 करोड़ डॉलर देते हैं जबकि चीन सालाना तकरीबन 4 करोड़ डॉलर या उससे भी कम राशि देता है। ट्रंप ने WHO को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा था कि कोरोना के प्रकोप में अपना कर्तव्य निभाने में वह पूरी तरह नाकाम हुआ रहा।

  • चीनी नागरिकों पर प्रतिबंध की तैयारी में US! गुस्साए ट्रंप ने किए कई बड़े ऐलान
  • चीन पर भड़के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, कई प्रतिबंधों की घोषणा की
  • कुछ चीनी नागरिकों को अमेरिका में नहीं मिलेगा प्रवेश, इन्वेस्टमेंट को भी करना पड़ेगा कठोर कानूनों का सामना
  • हॉन्ग कॉन्ग के साथ स्पेशल ट्रेड डील से भी बाहर हुआ यूएसए, चीन पर बौद्धिक संपदा के चोरी का लगाया आरोप।

व्हाइट हाउस में ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा कि वे अमेरिका में अध्ययन कर रहे चीनी शोधकर्ताओं पर प्रतिबंध लगाने भी जा रहे हैं। ये लोग अमेरिका की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। इसके साथ वे अमेरिकी स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध उन चीनी कंपनियों पर कार्रवाई करने भी जा रहे हैं जो अमेरिकी कानूनों का पालन नहीं कर रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के खिलाफ अपना गुस्सा हाजिर करते हुए कुछ चीनी नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाने का ऐलान किया। इतना ही नहीं, उन्होंने अमेरिका में चीन से आने वाले इन्वेस्टमेंट के नियमों को भी कड़ा करने का फैसला किया। बता दें कि कुछ दिन पहले ही अमेरिकी कांग्रेस में चीन के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाने को लेकर एक बिल पेश किया गया है।

नई ट्रेवल एडवाइजरी जारी करेगा यूएस
व्हाइट हाउस में मीडिया को संबोधित करते हुए ट्रंप ने यह भी कहा कि चीन के नए सुरक्षा कानून के जवाब में वह हांगकांग के साथ स्पेशल ट्रेड डील को खत्म कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अपने नागरिकों के हॉन्ग कॉन्ग यात्रा को लेकर नया ट्रेवल एडवाइजरी जारी करेगा। इससे चीन की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। ‘दुनिया को चीन से जवाब चाहिए’। ट्रंप ने चीन के खिलाफ आक्रामक लहजे में कहा कि दुनिया को चीन से जवाब चाहिए। ट्रंप ने कोरोना को चीन का वुहान वायरस करार देते हुए कहा, ‘चीन ने वुहान वायरस को छिपाकर कोरोना को पूरी दुनिया में फैलने की इजाजत दी। इससे एक वैश्विक महामारी पैदा हुई, जिसने 1 लाख से ज्यादा अमेरिकी नागरिकों की जान ले ली। पूरी दुनिया में लाखों लोगों की इस वायरस से मौत हुई।

चीन पर बौद्धिक संपदा के चोरी का आरोप
अमेरिकी रााष्ट्रपति ने चीन के ऊपर बौद्धिक संपदा के चोरी का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चीन ने अमेरिका से अरबों डॉलर कमाए जबकि यहां के लोगों को नौकरियां नहीं दी। चीन ने विश्व व्यापार संगठन को लेकर अपनी प्रतिबद्धताओं का भी उल्लंघन किया। गैरकानूनी रूप से दावा कर रहा चीन। ट्रंप ने आरोप लगाया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में गैरकानूनी रूप से द्वीप का निर्माण कर अपना दावा कर रहा है। यह स्वतंत्र नेविगेशन और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए खतरा है। इसके अलावा चीन ने हॉन्ग कॉन्ग को लेकर भी अपने वादे को तोड़ दिया है।

ट्रंप ने व्हाइट हाउस के पूर्वी कक्ष में संवाददाताओं से कहा कि हम इस बात पर विचार करेंगे कि अमेरिका चीन को वायरस के लिए दंड के रूप में अपने ऋण दायित्वों का भुगतान न करे। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों जैसे जर्मनी, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देश कोरोना वायरस के प्रसार के लिए चीन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इन देशों में महामारी से हुए नुकसान की भरपाई के लिए कई तरह की आवाजें उठ रही हैं। अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा है कि उनकी सरकार कोरोना वायरस के स्रोत की जांच कर रही है।

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