Friday, July 3, 2020

इजरायल में कोरोना की दवा खोजने वाला इंस्टीटट्यूट बनाता है ऐसे खतरनाक हथियार

इजरायल इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजिकल रिसर्च ने कोरोना की वैक्‍सीन को खोजने का काम किया है। इजरायल दुनिया का ऐसा देश हैं जो अत्‍याधुनिक तकनीक के लिए जाना जाता है, ऐसे में उसकी सबसे बड़ी मदद यहीं इंस्टीट्यूट करता है।

नई दिल्‍ली: दुनिया के तमाम बड़े देश इस समय कोरोना वायरस की दवा खोजने में लगे हुए हैं। इजरायल के रक्षा मंत्री ने दावा किया है कि उन्‍होंने इस महामारी की दवा खोज ली है। इजरायल इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजिकल रिसर्च ने कोरोना की वैक्‍सीन को खोजने का काम किया है। इजरायल दुनिया का ऐसा देश हैं जो अत्‍याधुनिक तकनीक के लिए जाना जाता है, ऐसे में उसकी सबसे बड़ी मदद यहीं इंस्टीट्यूट करता है।

इजरायल इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजिकल रिसर्च दुनिया की प्रतिष्ठित अनुसंधान और विकास एजेंसी है। इसमें अनुभवी और जानकार रिसर्चर और वैज्ञानिक हैं। इसका इंफ्रास्ट्रक्चर भी काफी उन्नत है। इस संस्थान में 50 से अधिक अनुभवी वैज्ञानिक काम कर रहे हैं जो वायरस के लिए उपचार विकसित करने पर रिसर्च कर रहे हैं। इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजिकल रिसर्च, मध्य इजरायल के Nes Tziona में स्थित है। इसकी स्थापना 1952 में इजरायल सशस्‍त्र बल के साइंस कॉर्प्स की यूनिट के रूप में की गई थी। बाद में यह एक नागरिक संगठन बन गया। तकनीकी रूप से ये प्रधानमंत्री कार्यालय की देखरेख में है, लेकिन रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर काम करता है।

इंस्टीटट्यूट बनाता है ऐसे खतरनाक हथियार


इजरायल की जिस हाईटेक डिफेंस बॉयोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ने कोरोना का टीका बनाने का दावा किया है, वो दुनिया की सबसे सिक्रेट यानी गुप्त संस्थाओं में से जानी जाती है। इस संस्थान से इजरायल के टॉप हुक्मरानों की मर्जी के वगैर शायद ही कोई जानकारी निकलती हो। इजरायल इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजिकल रिसर्च यानी IIBR भारी सुरक्षा इंतजामों के बीच पूरी दुनिया से छिपकर जैविक और रासायनिक हथियार बनाता है। IIBR संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए दवा विकसित करता है।

मिली जानकारी के अनुसार, इजरायल ने इस लैब की स्थापना 1952 में की थी। उसके बाद से ये बड़ी होती चली गई है। दुनियाभर की कई दवाएं इसके नाम पेटेंट हैं। ये माना जाता है कि ये लैब अगर किसी दवा या प्रोजेक्ट पर काम शुरू करती है तो उसमें इसको कामयाबी मिलती ही मिलती है। इस लैब के चारों ओर काफी सुरक्षा रहती है। यहां किसी भी अवांछित शख्स का घुस पाना असंभव है। इसमें व्यापक तौर पर सुरक्षा उपकरण लगे हैं। ये इंस्टीट्यूट तेल अवीब के करीब नेस जियोना कस्बे में है।

इजरायल की इस लैब ने 1959 में पोलियो की दवा सबसे पहले बनाई थी। उसके बाद उन्होंने एक्सप्लोसिव मैटीरियल का पता लगाने वाले किट बनाए, जिसका इस्तेमाल दुनियाभर में होता है। दुनियाभर में बिकने वाली सोग्रेन सिंड्रोम दवा यहीं ईजाद की गई, इसके अलावा उनके नाम कई बड़े पेटेंट हैं।

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