Friday, July 10, 2020

चीन से निपटने के लिए भारत ने एक साथ बनाया पांच ‘प्लान’, अब ड्रैगन से हिसाब लेने की बारी!

विस्तारवादी चीन से निपटने के लिए और उसको उसी की भाषा में जवाब देने के लिए भारत ने एक साथ पांच प्लान बनाया है और उसपर कार्यवाई भी शुरू कर दी है। भारत सरकार के इस प्लान से जहां चीन को पसीना आने लगा है, वहीं पाकिस्तान को समझ में नहीं आ रहा है कि ऐसे हालात में वो क्या करे।

नई दिल्ली: कोरोना संकट से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी है। भारत और चीन के बीच अक्साई चीन में स्थित गलवान घाटी को लेकर उस वक़्त तनाव पैदा हो गया जब गलवान घाटी के किनारे चीनी सेना ने कुछ टेंट लगा लिए। गलवान घाटी लद्दाख और अक्साई चीन के बीच भारत-चीन सीमा के नजदीक स्थित है। यहां पर वास्तविक नियंत्रण रेखा अक्साई चीन को भारत से अलग करती है। ये घाटी चीन के दक्षिणी शिनजियांग और भारत के लद्दाख तक फैली है।

इसके बाद भारत ने भी वहां फौज की तैनाती बढ़ा दी। चीन का आरोप है कि भारत गलवान घाटी के पास सुरक्षा संबंधी गैर-कानूनी निर्माण कर रहा है। भारत ने चीन के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि यह निर्माण कार्य भारतीय इलाके में हो रहा है। इससे पहले नौ मई को नॉर्थ सिक्किम के नाथू ला सेक्टर में भारतीय और चीनी सेना में झड़प हुई थी। उस वक्त लद्दाख में एलएसी के पास चीनी सेना के हेलिकॉप्टर देखे गए थे। फिर इसके बाद भारतीय वायु सेना ने भी सुखोई और दूसरे लड़ाकू विमानों की पट्रोलिंग शुरू कर दी थी।

चीनी मंसूबे और हालत की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ जनरल विपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुख भी शामिल रहे थे। जानकारी के मुताबिक इस बैठक में भारत की ओर से तय किया गया कि जिस भाषा में चीन बात समझता हो, उसे उसी भाषा में समझा दिया जाए। चीन ने सोचा नहीं होगा कि भारत इस तरह पलटवार करेगा। भारत के तल्ख तेवर के कारण अब चीन की चीख निकल रही है और वो डोकलाम की तरह लद्दाख से भी अपने सैनिकों से हटाकर दुनियाभर में अपनी फजीहत कराने के लिए मजूबर है।

चीन की इस बौखलाहट का तात्कालिक कारण तो डोकलाम संकट के बाद भारत द्वारा एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) के पास किए जा रहे अवसंरचनात्मक विकास की गतिविधियां हैं जिस पर चीन को आपत्ति है। गौरतलब है कि लद्दाख में एलएसी के नजदीक भारत द्वारा निर्मित किए जा रहे पुल पर चीन को आपत्ति है। गलवान घाटी जहां चीन ने बंकर बनाने पर जोर दिया है, वहीं एलएसी स्थित है और इसके पास भारत ने शियोक नदी से दौलत बेग ओल्डी तक 235 किमी लंबे अति सामरिक महत्व के सड़क का निर्माण कार्य लगभग पूरा कर लिया है।

दरअसल कोरोना महामारी के बाद बने हालात के बाद तमाम बड़ी शक्तियों के वैश्विक प्रभाव और वर्चस्व दांव पर लगे हुए हैं। आपदा को अवसर के रूप में अमेरिका भी देख रहा और चीन भी। वर्ष 2008 की र्आिथक मंदी के सबसे बड़े शिकार अमेरिका और यूरोपीय देशों की कमजोरी ने पिछले एक दशक में चीन की वैश्विक सुपर पॉवर बनने की हसरतों को बढ़ा दिया है। अब अमेरिका कोविड के बहाने चीन को दुनिया में अलग थलग करने की कोशिश में लगा है तो चीन भी कभी भय तो कभी प्रलोभन की राजनीति के जरिये अलग-अलग देशों को अपने गुट में शामिल करने में लगा हुआ है। इन दो बड़ी महाशक्तियों की शक्ति राजनीति का केंद्रबिंदु भारत बना हुआ है। यही कारण है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत और चीन के बीच मध्यस्थता के लिए पहल करने की मंशा के बहाने यह दिखाने की कोशिश भी की कि वह भारत के साथ खड़ा है और अभी भी विश्व में शांति व सुरक्षा को बनाए रखने वाला निर्णायक देश है।

इन सबके बीच चीन के सरकारी मीडिया और चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि ‘चीन और भारत आपसी विवादों को बातचीत और विमर्श के ज़रिये सुलझाने में पूरी तरह सक्षम हैं और दोनों देशों के पास बातचीत के ज़रिए मुद्दे सुलझाने का उचित तंत्र मौजूद है।’ सरकारी समाचार पत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ में छपे एक लेख के अनुसार, यह कहते हुए चीन ने भारत के साथ जारी विवाद को अमरीका की मध्यस्थता के ज़रिये समाप्त करने की पेशकश को ठुकरा दिया है। अखबार ने लिखा है कि ‘दोनों देशों को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ऐसी मदद की ज़रूरत नहीं है।’ साथ ही यह भी लिखा है कि ‘दोनों देशो को अमरीका से सतर्क रहना चाहिए जो क्षेत्र में शांति और सद्भाव को बिगाड़ने के अवसर तलाशता रहता है।’

इन सबके बीच भारत भी चीन से टकराव नहीं चाहता है लेकिन वक्त-वे-वक्त एलएसी की चीन की हरकतें और पाकिस्तान के जरिए भारत को परेशान करने की उसकी चालबाजी से भारत धीरे-धीरे आजिज आने लगा है। विस्तारवादी चीन से निपटने के लिए और उसको उसी की भाषा में जवाब देने के लिए भारत ने एक साथ पांच प्लान बनाया है और उस पर कार्यवाई भी शुरू कर दी है। भारत सरकार के इस प्लान से जहां चीन को पसीना आने लगा है वहीं पाकिस्तान को अब समझ नहीं आ रहा है कि वो क्या करे।

चीन से निपटने के लिए भारत ने बनाया है यह खास प्लान

प्लान नंबर वन
इस समय भारत जहां कोरोना महामारी से निपटने पर अपना पूरा ध्यान लगाए हुए है वहीं चीन ने भारतीय सीमा के पास 5000 से ज्यादा सैनिकों को तैनात कर दिया। लिहाजा चीन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत को भी अपनी फौज की तैनाती करनी पड़ी। कोरोना संकट को लेकर अमेरिका ने चीन के खिलाफ बड़ा कूटनीतिक युद्ध छेड़ रखा। मौके की नजाकत को समझते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्वीट किया कि हमने भारत और चीन दोनों को सूचित किया है कि उनके तीखे सीमा विवाद पर अमेरिका मध्यस्थता करने को तैयार है। लिहाजा भारत की नाराजगी और अमेरिका के गुस्से के बीच अब दुनियाभर में चीन अलग थलग पड़ने लगा है।

प्लान नंबर टू
चीन ने ताइवान पर जबरन अतिक्रमण कर रखा है। वहां लागातार आजादी की मांग तेज होती जा रही है। इस बीच भारत ने ताइवान का कूटनीतिक समर्थन कर दिया। बुधवार को ताइवन की नई राष्ट्रपति साइ इंग वेन के शपथ ग्रहण समारोह में बीजेपी के दो सांसदों मीनाक्षी लेखी और राहुल कस्वां ने ऑनलाइन शिरकत की और उनको बधाई दी। भारत के इस कदम से जहां ताइवान को ताकत मिली है वहीं चीन तिलमिलाया गया है।

प्लान नंबर थ्री
हॉन्गकॉन्ग में भी चीन के खिलाफ भारी नाराजगी है। हॉन्गकॉन्ग लगातार अपनी आजादी की मांग कर रखा है। वहां हिंसक प्रदर्शन जारी है। इन प्रदर्शनों के बीच चीन ने उसके लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून संसद में पेश कर दिया। भारत हॉन्गकॉन्ग के लोकतांत्रिक मूल्यों का समर्थन करता है।

प्लान नंबर फोर
चीन में उइगर मुसलमानों से भेदभाव और उत्पीड़न किसी से छिपा नहीं है। अमेरिकी संसद (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव) में चीन में उइगर मुसलमानों से भेदभाव के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल बुधवार को बहुमत से पारित कर दिया। अब इस बिल को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पास भेजा जाएगा। ट्रम्प के इसपर साइन करते ही यह एक कानून बन जाएगा। चीन के शिनजियांग राज्य के सुदूर पश्चिमी क्षेत्र में उइगर मुसलमानों के साथ अत्याचार की रिपोर्ट कई बार सामने आई है। यहां पर उइगर मुसलमानों को बढ़ी हुई दाढ़ी और ज्यादा बच्चे होने के कारण नजरबंद शिविरों में भेजने का भी खुलासा हुआ था। चीन की मुश्किलें यहां भी बढ़ने वाली है।

प्लान नंबर पाइव
विस्तावादी चीन पर सबसे बड़ा चोट आर्थिक रुप से पड़ने वाला है। चीन को घेरने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के चक्रव्यूह का तीसरा व्यूह आर्थिक मोर्चा है। कोरोना ने दुनिया में चीन की साख को मिट्टी में मिला दिया है। वहां पर कोई भी कंपनी काम नहीं करना चाहती। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले से ही दुनिया से कह रहे हैं कि चीन को अलग-थलग कर देना है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना कहे ही बहुत कुछ इशारा तब कर दिया था जब आत्मनिर्भर भारत का नारा दिया।

आपको बात दें कि ड्रैगन की ओर से भले ही आक्रामकता दिखाई जा रही हो, लेकिन भारत भी धैर्य के साथ तैयारियां कर रहा है। सीमा पर तनाव के बीच 1962 के भारत-चीन युद्ध की यादें ताजा हो रही हैं। चीन ने यह युद्ध ऐसे समय पर छेड़ा था जब भारत उसपर विश्वास करने लगा था और दोस्ती के नए अध्याय लिखे जा रहे थे। इसी दौर हिंदी-चीनी भाई-भाई का नारा भी बुलंद हुआ था। लेकिन चीन की हरकत ने इस दोस्ती की पीठ पर दगाबाजी का छुरा घोंप दिया।

 

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